लखनऊ मेट्रो ने मूक-बधिर महिला और उसके बच्चे की सहायता कर सुरक्षित किया
लखनऊ। लखनऊ मेट्रो के कर्मचारियों ने एक बार फिर यह साबित किया कि यात्री सुरक्षा के लिए मेट्रो कर्मचारी कितने संवेदनशील हैं। मंगलवार को एक महिला, जो बोलने और सुनने में असमर्थ है, पिछले कई दिनों से अपने बच्चे को गोद में लिए भटकते हुए आलमबाग बस स्टैंड मेट्रो स्टेशन पहुंची। मेट्रो स्टेशन के आस-पास कई घंटों से भटकते देख जब मेट्रो सुरक्षा कर्मियों की नजर महिला पर पड़ी, तो वे तुरंत मदद के लिए आगे आए।
लिखकर बताया अपना नाम और पता, मेट्रो टीम ने तुरंत लिया संज्ञान
महिला को परेशान देखते हुए मेट्रो सुरक्षा कर्मियों ने उनसे संपर्क किया और यह समझने की कोशिश की कि उन्हें किस तरह की सहायता की ज़रूरत है। चूंकि महिला बोलने और सुनने में असमर्थ थी, इसलिए उनसे अपनी जानकारी लिखकर देने का अनुरोध किया गया। महिला द्वारा लिखी गई जानकारी से उनका नाम सावित्री देवी और पता मुंबई के कल्याणपुर स्थित रीक्षा गांव प्राप्त हुआ।
इस जानकारी के बाद मेट्रो टीम ने मामले को केवल एक सामान्य यात्री सहायता के रूप में नहीं देखा, बल्कि तुरंत लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट से संपर्क किया।
घटनाक्रम एक नज़र में:
- महिला और बच्चा कई दिनों से आलमबाग मेट्रो स्टेशन के आस-पास भटक रहे थे
- मेट्रो सुरक्षा कर्मियों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मदद की पहल की
- लिखित जानकारी से पहचान: नाम सावित्री देवी, पता मुंबई का कल्याणपुर (रीक्षा गांव)
- मेट्रो टीम ने तुरंत लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट को सूचित किया
- महिला कांस्टेबल आलमबाग स्टेशन पहुंचीं और जांच के बाद मां-बच्चे को सुरक्षित पुलिस को सौंपा गया
पुलिस कमिश्नरेट की टीम पहुंची, जांच के बाद मां-बच्चे को सौंपा गया सुरक्षित
मेट्रो की पहल पर लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की एक महिला कांस्टेबल आलमबाग मेट्रो स्टेशन पहुंचीं। आवश्यक जांच और औपचारिकताओं के बाद सावित्री देवी और उनके बच्चे को सुरक्षित रूप से पुलिस को सौंप दिया गया।
यूपी मेट्रो की प्रतिबद्धता: सुरक्षा और सहायता दोनों में अव्वल
उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के साथ-साथ जरूरत के समय उनकी मदद के लिए भी प्रतिबद्ध है। मेट्रो कर्मचारी यात्रियों की स्थिति पर नजर रखते हुए ज़रूरत पड़ने पर आगे बढ़कर सहायता करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।
निष्कर्ष
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि लखनऊ मेट्रो केवल एक परिवहन सेवा नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल भी है। मेट्रो कर्मियों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से एक असहाय मां-बच्चे को समय रहते सुरक्षित सहायता मिल सकी।
