लैपटॉप नहीं, हौसला मिला, अब भरेंगे उड़ान: पुनर्वास विवि के दृष्टिबाधित दिव्यांगों को मिला मुफ्त लैपटॉप
25 दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को मिले 21.25 लाख रुपये के निःशुल्क लैपटॉप
लखनऊ। डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में हेल्प द ब्लाइंड फाउंडेशन (एचटीबीएफ) के सहयोग से संचालित Empowerment through Mobility, Education and Training (ईएमईटी) कार्यक्रम के तहत 25 दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को निःशुल्क लैपटॉप दिए गए। एक लैपटॉप की कीमत 85 हजार रुपये है, यानी विद्यार्थियों को कुल 21.25 लाख रुपये के लैपटॉप वितरित किए गए। विद्यार्थियों ने कहा कि उन्हें सिर्फ लैपटॉप नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का हौसला मिला है।
कुलपति आचार्य संजय सिंह ने विद्यार्थियों को स्वयं लैपटॉप प्रदान किए। इस अवसर पर विश्वविद्यालय और एचटीबीएफ के बीच समझौता ज्ञापन के नवीनीकरण और आदान-प्रदान की प्रक्रिया भी पूरी हुई। इन लैपटॉप की मदद से विद्यार्थी पढ़ाई, डिजिटल कौशल और ऑनलाइन संसाधनों का स्वतंत्र रूप से उपयोग कर सकेंगे, जिससे उनकी आत्मनिर्भरता और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
कुलपति बोले- 26 जनवरी की परेड में दिव्यांग विद्यार्थियों की भागीदारी मेरा विजन
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति आचार्य संजय सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में दृष्टिबाधित दिव्यांग विद्यार्थी डिजिटल स्क्राइब के साथ परीक्षा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में नई विधाओं को सीखने का हौसला है और डिजिटल तकनीक उनके लिए आत्मनिर्भरता व समान अवसर का माध्यम बन रही है।
उन्होंने अपना विजन साझा करते हुए कहा कि दिव्यांग विद्यार्थियों का एक दल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हो, जिसमें सफेद छड़ी सहायक सिद्ध हो सकती है। उनके अनुसार यह दुनिया के लिए एक उदाहरण होगा कि दिव्यांग विद्यार्थी मुख्यधारा में शामिल होकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं।
मुख्य बिंदु एक नज़र में:
- 25 दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को मिला मुफ्त लैपटॉप
- कुल लागत: ₹21.25 लाख (प्रति लैपटॉप ₹85,000)
- हेल्प द ब्लाइंड फाउंडेशन के सहयोग से EMET कार्यक्रम
- विश्वविद्यालय-फाउंडेशन MoU का नवीनीकरण
- डिजिटल स्क्राइब के साथ परीक्षा देने वाला पहला विश्वविद्यालय बनने की दिशा में कदम
- 26 जनवरी परेड में दिव्यांग विद्यार्थियों की भागीदारी का विजन
डिजिटल स्क्राइब के साथ परीक्षा देने वाला पहला विश्वविद्यालय बनने की ओर पुनर्वास विवि
एचटीबीएफ के ट्रस्टी राधाकृष्णन ने कहा कि संस्था और विश्वविद्यालय के बीच सहयोग का मूल उद्देश्य दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को तकनीक, प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराना है। परियोजना प्रमुख पूजा ने ईएमईटी कार्यक्रम की गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी साझा की।
विवि समझौता ज्ञापन समन्वयक डॉ. विजय शंकर शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों को सही समय पर तकनीकी प्रशिक्षण, उपकरण और मार्गदर्शन मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय और फाउंडेशन के बीच सहयोग को आगे और विस्तार दिया जाएगा।
इस अवसर पर प्रो. आशुतोष पांडेय, प्रो. यशवंत वीरोदय, डॉ. कौशल शर्मा, डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. प्रवीण मिश्रा और डॉ. श्याम सिंह सहित विश्वविद्यालय एवं एचटीबीएफ के अधिकारी, शिक्षक, प्रशिक्षु और विद्यार्थी मौजूद रहे।
विद्यार्थियों की जुबानी: "लैपटॉप नहीं, हौसला मिला, अब भरेंगे उड़ान
लैपटॉप मिला है, अब इससे कुछ नया करेंगे। सामान्य विद्यार्थियों के साथ बराबरी करेंगे। डिजिटल स्क्राइब के साथ परीक्षा देंगे। पुनर्वास विश्वविद्यालय दिव्यांगों के लिए वरदान से कम नहीं है।" — रोहित यादव, बीए द्वितीय वर्ष
"लैपटॉप पाकर महसूस कर रहा हूं कि अवसर के राह खुले हैं। हम आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ चले हैं। पहले हम दूसरों पर निर्भर थे। अब बेहतरी की ओर कदम बढ़ाएंगे।" — सुमित कुमार, स्नातक द्वितीय वर्ष
निष्कर्ष
डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की यह पहल दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए सिर्फ तकनीकी संसाधन नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई उड़ान है। डिजिटल स्क्राइब व्यवस्था और 26 जनवरी परेड में भागीदारी जैसे कदम दिव्यांग विद्यार्थियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास साबित हो रहे हैं।
