Search News

शहीद जवानों के सम्मान में BSF की नई पहल: पोस्ट का नाम होगा 'सिंदूर', दो चौकियों को मिलेगा शहीदों का नाम

बीएसएफ ने एलओसी पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वीरगति को प्राप्त जवानों की स्मृति में चौकियों का नाम रखने का प्रस्ताव भेजा है। इस मिशन में महिलाओं ने अग्रिम मोर्चे पर डटकर पाकिस्तान को जवाब दिया।
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Kritika pandey
  • Updated: May 27, 2025

कैनविज टाइम्स, डिजिटल डेस्क । 

सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने वीरगति को प्राप्त जवानों की स्मृति में उनकी शहादत को अमर करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। बीएसएफ ने एलओसी पर पाकिस्तानी गोलीबारी का मुंहतोड़ जवाब देने वाले ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के तहत दो पोस्ट का नाम शहीदों के नाम पर रखने और एक अग्रिम चौकी का नाम 'सिंदूर' रखने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा है। बीएसएफ के आईजी जम्मू, शशांक आनंद ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस प्रस्ताव की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 9 और 10 मई को एलओसी के पास स्थित लश्कर-ए-तैयबा के लॉन्चपैड्स पर हमला करने की योजना बनाई गई थी। इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान की ओर से की गई भारी गोलीबारी का जवाब देते हुए बीएसएफ ने कई पाकिस्तानी चौकियों को तबाह कर दिया। आईजी ने बताया कि लूनी क्षेत्र में लश्कर के लॉन्चपैड पर हमला कर आतंकियों को भारी नुकसान पहुंचाया गया। इस अभियान में बीएसएफ की महिला कर्मियों ने अग्रिम चौकियों पर बहादुरी से मोर्चा संभाला। सहायक कमांडेंट नेहा भंडारी ने एक अग्रिम चौकी की कमान संभाली, जबकि कांस्टेबल मंजीत कौर, मलकीत कौर, ज्योति, सम्पा और स्वप्ना जैसी महिला जवानों ने मोर्चे पर डटकर दुश्मन का सामना किया।

इस हमले में भारत को भी क्षति झेलनी पड़ी। पाकिस्तानी गोलाबारी और ड्रोन हमलों में बीएसएफ के सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद इम्तियाज, कॉन्स्टेबल दीपक कुमार और भारतीय सेना के नायक सुनील कुमार शहीद हो गए। इन्हीं की स्मृति में दो पोस्ट का नामकरण इन शहीदों के नाम पर किया जाएगा, जबकि एक पोस्ट को 'सिंदूर' नाम दिया जाएगा, जो इस ऑपरेशन की वीरगाथा को दर्शाएगा। बीएसएफ ने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की तरफ से लगातार की जा रही गोलीबारी की उन्हें पहले से जानकारी थी और उन्होंने पूरी तैयारी के साथ जवाब दिया। जवाबी कार्रवाई में कई पाकिस्तानी चौकियों को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया, जबकि भारत की तरफ कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। बीएसएफ के इस फैसले को न केवल सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि यह देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले जवानों को सम्मान देने की एक प्रेरणादायक पहल भी है।

Breaking News:

Recent News: