कैनविज टाइम्स, डिजिटल डेस्क ।
वड़ा का नाम सुनते ही कई लोगों के मुंह में पानी आ जाता है। दक्षिण भारत की यह पारंपरिक डिश सिर्फ स्वाद में ही बेहतरीन नहीं है, बल्कि इसके डिजाइन के पीछे भी एक दिलचस्प विज्ञान छिपा है। क्या आपने कभी गौर किया है कि वड़े के बीच में गोल छेद क्यों होता है? असल में, इस छेद की वजह केवल सौंदर्य नहीं है, बल्कि यह वड़े के पूरी तरह से पकने, कुरकुरे टेक्सचर और हल्केपन से जुड़ा हुआ है। वड़े का घोल गाढ़ा होता है। यदि इसे बिना छेद के तला जाए तो बाहर की परत तो पक जाती है, लेकिन अंदर का हिस्सा अधपका रह सकता है। छेद होने से गर्म तेल वड़े के अंदर तक पहुंचता है और वह अंदर-बाहर से पूरी तरह पकता है। साथ ही, तलते समय यह छेद वड़े को चारों तरफ से कुरकुरा बनाता है। इसके अलावा, छेद के कारण अतिरिक्त तेल भी आसानी से बाहर निकल जाता है, जिससे वड़ा कम ऑयली और खाने में हल्का लगता है। इतना ही नहीं, जब आप वड़े को सांभर या नारियल की चटनी में डुबोते हैं, तो छेद के रास्ते वह स्वाद भी अंदर तक चला जाता है और हर बाइट में आपको भरपूर स्वाद मिलता है। इसलिए अगली बार जब भी आप गरमा-गरम सांभर वड़ा खाएं, तो उसके बीच मौजूद इस गोल छेद को देखकर मुस्कुरा उठिए, क्योंकि यही छेद उसे इतना खास बनाता है।
