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11 सूत्रीय मांगों को लेकर 4 नवंबर को गरजेंगे शिक्षणेत्तर कर्मचारी, शिक्षा निदेशालय पर देंगे धरना कैनविज टाइम्स संवाददाता। लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षणेत्तर संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर शासन और शिक्षा विभाग के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। संगठन की ओर से 4 नवंबर 2026 को शिक्षा निदेशालय (माध्यमिक), शिविर कार्यालय लखनऊ में एक दिवसीय धरना दिया जाएगा। धरने का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष श्री अजय कुमार शर्मा करेंगे। धरने की तैयारियों और आंदोलन की रूपरेखा को लेकर प्रदेश अध्यक्ष श्री अजय कुमार श

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षणेत्तर संघ 4 नवंबर को लखनऊ में शिक्षा निदेशालय पर धरना देगा। पुरानी पेंशन, CCC समाप्ति, कैशलेस इलाज समेत 11 मांगें उठेंगी।
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Shivam Srivastava
  • Updated: November 5, 2026

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षणेत्तर संघ का ऐलान: वर्षों से लंबित मांगों पर शासनादेश न होने से कर्मचारियों में आक्रोश, प्रदेश अध्यक्ष बोले, "अब आर-पार की लड़ाई"

 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षणेत्तर संघ (यू.पी. एजूकेशनल मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर शासन और शिक्षा विभाग के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। संगठन 4 नवंबर 2026 को शिक्षा निदेशालय (माध्यमिक), शिविर कार्यालय लखनऊ में एक दिवसीय धरना देगा। धरने का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार शर्मा करेंगे।

धरने की रूपरेखा और रणनीति पर प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार शर्मा, प्रदेश कोषाध्यक्ष अनूप कुमार द्विवेदी और लखनऊ के जिला अध्यक्ष अनूप कुमार सिंह ने विचार-विमर्श किया। इसमें धरने को सफल बनाने और कर्मचारियों की मांगों को प्रभावी ढंग से रखने पर चर्चा हुई।

कई दौर की वार्ता, फिर भी नहीं निकला समाधान

प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार शर्मा के अनुसार संगठन की प्रमुख मांगें वर्षों से लंबित हैं। इन पर विभागीय और शासन स्तर के अधिकारियों से कई बार वार्ता हो चुकी है:

  • 4 अक्टूबर 2021: माध्यमिक शिक्षा मंत्री के निर्देश पर विशेष सचिव श्री शम्भू कुमार की अध्यक्षता में संगठन की आधिकारिक वार्ता बैठक हुई।
  • 8 अप्रैल 2025: विशेष सचिव, माध्यमिक शिक्षा की अध्यक्षता में बैठक हुई।
  • 30 सितंबर 2025: सचिव, माध्यमिक शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें प्रबंध समिति में शिक्षकों की तरह शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के प्रतिनिधित्व सहित अन्य मांगों पर सहमति बनी थी। शासन और विभाग स्तर पर शासनादेश जारी करने की कार्यवाही के निर्देश भी दिए गए थे।

संगठन का कहना है कि कैशलेस चिकित्सा सुविधा को छोड़कर बाकी मांगों के शासनादेश अब तक जारी नहीं हुए हैं। इससे प्रदेश का शिक्षणेत्तर कर्मचारी आंदोलित है और सरकार के प्रति असंतोष व्याप्त है।

धरने में उठाई जाने वाली 11 सूत्रीय मांगें

  1. शिक्षक पद पर पदोन्नति: अर्ह शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को शिक्षक पद पर पदोन्नति देने की पत्रावली शासन में लंबित है, इस पर कार्यवाही की मांग।
  2. 300 दिन के अर्जित अवकाश का नकदीकरण: राजकीय कर्मचारियों की तरह सेवानिवृत्ति पर यह लाभ दिया जाए। प्रस्ताव माध्यमिक शिक्षा निदेशालय से शासन को मिल चुका है।
  3. प्रबंध समिति में प्रतिनिधित्व: प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है, जिस पर शासन ने दोबारा स्पष्ट प्रस्ताव मांगा है। निदेशालय और शासन स्तर पर कार्यवाही की अपेक्षा।
  4. पुरस्कार का प्रावधान: अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की तरह शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए भी पुरस्कार की व्यवस्था हो।
  5. CCC की अनिवार्यता समाप्त हो: चतुर्थ श्रेणी से लिपिक पद पर पदोन्नति के लिए डोएक सोसाइटी का CCC डिप्लोमा अनिवार्य है, जबकि राजकीय विद्यालयों में यह प्रावधान नहीं है। इसे समाप्त करने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है।
  6. वेतन विसंगति दूर हो: अशासकीय सहायता प्राप्त हाईस्कूल/इंटरमीडिएट विद्यालयों के लिपिकों की वेतन विसंगति समाप्त की जाए।
  7. रोके गए भत्ते बहाल हों: नगर प्रतिकर भत्ता, स्वैच्छिक परिवार कल्याण भत्ता और कोरोना काल के महंगाई भत्ते का बकाया बहाल किया जाए। साथ ही वर्ष 2014 के बाद नियुक्त कर्मचारियों की सामूहिक बीमा कटौती की मांग भी शामिल है।
  8. पुरानी पेंशन योजना: 1 अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त शिक्षणेत्तर कर्मचारियों पर पुरानी पेंशन लागू हो।
  9. पदोन्नति पर वेतन वृद्धि: चतुर्थ श्रेणी से सहायक लिपिक और सहायक लिपिक से प्रधान लिपिक पद पर पदोन्नति पर पूर्व की भांति (22बी का लाभ) एक वेतन वृद्धि दी जाए।
  10. चतुर्थ श्रेणी की नियुक्ति दोबारा शुरू हो: अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में लंबे समय से नियमित नियुक्ति नहीं हो रही, जिससे विद्यालयों का कार्य प्रभावित है।
  11. आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को राहत: उनका वेतन प्रतिमाह सीधे कोषागार के माध्यम से खाते में भेजा जाए। सेवा सुरक्षा नियमावली बने और उन्हें भी शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की तरह कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिले।

"अब आर-पार की लड़ाई"

प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार शर्मा ने कहा कि शिक्षणेत्तर कर्मचारी विद्यालयों की व्यवस्था और शैक्षिक गतिविधियों को सुचारु रूप से चलाने में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन लंबे समय से उनकी समस्याओं की अनदेखी हो रही है। उन्होंने कहा कि अब संगठन अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार है।

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