कैनवीज़ टाइम्स , डिजिटल डेस्क ।
देश की राजधानी दिल्ली के चांदनी चौक स्थित भागीरथी पैलेस, जो कि भारत का सबसे बड़ा थोक दवा बाजार है, नकली दवाओं के अवैध कारोबार का केंद्र बनता जा रहा है। दिल्ली औषधि नियंत्रण विभाग और दिल्ली पुलिस की संयुक्त छापेमारी में यहां से 14 करोड़ रुपये से अधिक की नकली दवाएं बरामद की गई हैं। ये नकली दवाएं कैंसर, हृदय रोग, डायबिटीज, किडनी और नसों के रोगों के इलाज के नाम पर मरीजों को बेची जा रही थीं।
कैसे हुआ खुलासा?
दिल्ली औषधि नियंत्रण विभाग को लंबे समय से भागीरथी पैलेस में नकली दवाओं के कारोबार की जानकारी मिल रही थी। इसके आधार पर विभाग और दिल्ली पुलिस की एक संयुक्त टीम ने यहां छापेमारी की। जांच में सामने आया कि ये नकली दवाएं बड़े पैमाने पर नामी दवा कंपनियों के ब्रांड नाम और पैकेजिंग की नकल करके बनाई गई थीं।
नकली दवाओं की पहचान कैसे हो रही थी मुश्किल?
जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि नकली दवाओं की पैकेजिंग, बारकोड और क्यूआर कोड असली दवाओं जैसे थे, जिससे दुकानदार और ग्राहक आसानी से भ्रमित हो जाते थे। इन नकली दवाओं का इस्तेमाल कैंसर, हृदय रोग, किडनी रोग और डायबिटीज जैसी जानलेवा बीमारियों के इलाज के लिए किया जा रहा था, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ रही थी।
भागीरथी पैलेस: नकली दवाओं का बड़ा केंद्र?
भागीरथी पैलेस, जो 1969 से देश का सबसे बड़ा थोक दवा बाजार है, अब नकली दवाओं के अवैध कारोबार का केंद्र बनता जा रहा है। पिछले तीन वर्षों में यहां हुई छापेमारियों में 14 करोड़ रुपये से अधिक की नकली दवाएं बरामद हो चुकी हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस अवैध कारोबार को बढ़ावा देने में कमजोर निगरानी व्यवस्था और भ्रष्ट तंत्र का बड़ा हाथ है। नकली दवाओं का उत्पादन और बिक्री नेटवर्क इतना संगठित है कि जांच एजेंसियों को इसे पूरी तरह खत्म करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
क्या है प्रशासन की अगली कार्रवाई?
दिल्ली औषधि नियंत्रण विभाग ने नकली दवाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाने का आश्वासन दिया है। दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा, भागीरथी पैलेस में सभी दवा दुकानों की नियमित जांच की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नकली दवाओं का कारोबार न केवल मरीजों की जान के लिए खतरा है, बल्कि यह देश की स्वास्थ्य प्रणाली पर भी एक काला धब्बा है। इस समस्या के समाधान के लिए सख्त नियम और निगरानी की आवश्यकता है।
