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1971 युद्ध में भारतीय वीरता की अनोखी कहानी: रिटायर्ड कर्नल अशोक कुमार तारा ने शेख मुजीब-उर-रहमान के परिवार को पाकिस्तानी सेना के हमले से बचाकर रचा इतिहास

1971 की जंग में भारतीय सेना के रिटायर्ड कर्नल अशोक कुमार तारा ने दो जवानों के साथ बांग्लादेश के पूर्व प्रधानमंत्री शेख मुजीब-उर-रहमान के परिवार को पाकिस्तानी सेना से बहादुरी के साथ बचाया था। उनके साहस के लिए उन्हें बांग्लादेश के सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Kritika pandey
  • Updated: May 10, 2025

कैनवीज़ टाइम्स , डिजिटल डेस्क । 

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय सेना के रिटायर्ड कर्नल अशोक कुमार तारा ने अपने अदम्य साहस और नेतृत्व क्षमता का परिचय देते हुए बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के नायक और पूर्व प्रधानमंत्री शेख मुजीब-उर-रहमान के परिवार को पाकिस्तानी सेना के हमले से सुरक्षित बचाया था। यह घटना उस समय हुई थी जब बांग्लादेश अपनी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहा था और पाकिस्तानी सेना हिंसा का सहारा ले रही थी। कर्नल तारा ने बताया कि उन्हें सूचना मिली कि पाकिस्तानी सैनिक शेख मुजीब के घर पर हमला करने वाले हैं। उन्होंने तुरंत अपनी जान की परवाह किए बिना, दो भारतीय सैनिकों के साथ वहां पहुंचकर मोर्चा संभाला। उनकी सूझबूझ और बहादुरी ने शेख मुजीब के परिवार को बचा लिया, जिसमें उनकी बेटी और बांग्लादेश की भविष्य की प्रधानमंत्री शेख हसीना भी शामिल थीं।

उनकी इस असाधारण वीरता के लिए बांग्लादेश सरकार ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया। कर्नल तारा आज नोएडा के सेक्टर-28 में रहते हैं और उन्होंने बांग्लादेश में हुए तख्तापलट पर भी दुख जताया, जिसमें शेख मुजीब और उनके परिवार के अधिकांश सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। 

1971 का युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच एक ऐतिहासिक संघर्ष था, जिसमें भारतीय सेना की निर्णायक जीत ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) को स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा दिलाया। कर्नल तारा जैसे बहादुर सैनिकों के योगदान ने इस जीत को संभव बनाया।

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