कैनविज टाइम्स,डिजिटल डेस्क। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 2024 में खेले गए बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (BGT) में नीतीश कुमार रेड्डी ने अपनी शानदार बल्लेबाजी से सभी का ध्यान आकर्षित किया। खासकर, मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) पर खेले गए मैच में उनके शतक ने मैच का रुख ही बदल दिया। लेकिन उनके क्रिकेट करियर की ये सफलता आसान नहीं रही, इसके पीछे एक प्रेरणादायक कहानी छिपी हुई है।
पिता ने छोड़ी नौकरी
नीतीश कुमार का परिवार शुरू में क्रिकेट को लेकर संकोच में था, क्योंकि यह एक जोखिम भरी पेशेवर यात्रा हो सकती थी। लेकिन नीतीश के पिता ने अपने बेटे के सपनों को साकार करने के लिए अपना स्थिर और सुरक्षित करियर छोड़ दिया। उनका मानना था कि अगर नीतीश को क्रिकेट में अपनी पहचान बनानी है, तो उन्हें इस खेल के लिए पूरी तरह से समर्पित होने का मौका मिलना चाहिए। इस फैसले ने नीतीश को न केवल मानसिक बल्कि आर्थिक रूप से भी क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा दी।
पंड्या से मुलाकात ने बदला भाग्य
नीतीश कुमार की किस्मत तब पलटी, जब उन्होंने भारतीय क्रिकेटर हार्दिक पंड्या से मुलाकात की। पंड्या की प्रेरणा और मार्गदर्शन ने नीतीश को मानसिक रूप से मजबूती दी। पंड्या ने उन्हें अपनी तकनीक और खेल पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी, जिससे नीतीश के आत्मविश्वास में इज़ाफा हुआ। पंड्या से मिली यह प्रेरणा उनके क्रिकेट करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई।
MCG में शतक से पलटा मैच
2024 में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान, नीतीश कुमार रेड्डी ने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक अहम मैच में शतक बनाया। उनकी इस शानदार पारी ने भारतीय टीम को संकट से उबारते हुए मैच का रुख बदल दिया। यह शतक न केवल नीतीश के करियर के लिए महत्वपूर्ण था, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का क्षण भी था। इस पारी ने साबित कर दिया कि नीतीश अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण से बड़े मंच पर अपने खेल को साबित कर सकते हैं। नीतीश कुमार रेड्डी की कहानी एक प्रेरणा है कि अगर किसी को सपने देखने का मौका मिले और सही मार्गदर्शन मिले, तो वह अपनी मेहनत और समर्पण से किसी भी मुश्किल को पार कर सकता है।
