कैनविज टाइम्स,डिजिटल डेस्क।उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख डॉ. संजय निषाद ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव के लिए न तो टिकट दिया है और न ही चुनाव चिन्ह (सिंबल)। उनका यह बयान पार्टी के खिलाफ उनके बगावती तेवरों को उजागर करता है, जिससे राजनीतिक हलचल मच गई है।
डॉ. संजय निषाद ने कहा कि उनकी पार्टी को विधानसभा चुनाव में बीजेपी के गठबंधन में शामिल किया गया था, लेकिन अब पार्टी उन्हें नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ने सरकार के गठन में अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन अब पार्टी के भीतर उनके योगदान का कोई सम्मान नहीं किया जा रहा। उनके मुताबिक, चुनावी टिकट और सिंबल के मामले में पार्टी ने उन्हें पूरी तरह से हाशिये पर डाल दिया है, और इस स्थिति से उनका गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
“भा.ज.पा. ने हमें धोखा दिया”
डॉ. निषाद ने स्पष्ट रूप से कहा कि बीजेपी ने उनके साथ धोखा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने उनके साथ कभी भी उचित संवाद नहीं किया और चुनावी मामलों में उनका सम्मान नहीं किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पार्टी उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती और स्थिति यही बनी रहती है, तो वे पार्टी के फैसले के खिलाफ कड़े कदम उठा सकते हैं।
यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा तूफान ला सकता है, क्योंकि निषाद पार्टी भारतीय जनता पार्टी का एक महत्वपूर्ण सहयोगी दल है। उनकी नाराजगी से आगामी विधानसभा चुनावों में गठबंधन की स्थिति पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
कितनी गंभीर है स्थिति?
डॉ. संजय निषाद का यह बयान यूपी की राजनीति में एक नए मोड़ की ओर इशारा कर रहा है। 2017 के विधानसभा चुनाव में निषाद पार्टी ने बीजेपी के साथ गठबंधन किया था और उसे जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस गठबंधन ने बीजेपी को उत्तर प्रदेश में सत्ता दिलाने में मदद की थी। लेकिन अब, जब 2025 के विधानसभा चुनावों की तैयारी जोरों पर है, डॉ. निषाद की नाराजगी से यह साफ हो गया है कि गठबंधन में दरार आ सकती है।
इस बगावती रवैये से न केवल निषाद पार्टी की स्थिति प्रभावित हो सकती है, बल्कि बीजेपी को भी यूपी में अपने सहयोगी दलों के साथ तालमेल बनाए रखने में मुश्किल हो सकती है। हालांकि, बीजेपी की तरफ से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन डॉ. निषाद के बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।
डॉ. संजय निषाद ने स्पष्ट कर दिया कि यदि उनकी पार्टी के अधिकारों की अनदेखी की जाती रही, तो वे बीजेपी के खिलाफ अपने कदम उठा सकते हैं। ऐसे में यदि निषाद पार्टी ने अलग रास्ता अपनाया या गठबंधन से बाहर निकला, तो यह उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ी उलटफेर का कारण बन सकता है।
