कैनविज टाइम्स, डिजिटल डेस्क ।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई ने बुधवार को न्यायालय की कार्यवाही के दौरान वकीलों पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि गर्मी की छुट्टियों में जब पांच वरिष्ठ जज अपनी छुट्टियाँ छोड़कर काम कर रहे हैं, तब भी वकील काम के लिए तैयार नहीं होते और इसके बावजूद न्यायपालिका को ही लंबित मामलों का दोषी ठहराया जाता है। CJI बीआर गवई और न्यायमूर्ति जॉर्ज मसीह की पीठ के समक्ष एक वकील ने याचिका को ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। इस पर CJI ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा पांच बड़े जज छुट्टियों में काम कर रहे हैं, फिर भी दोष हम पर आता है। आप लोग (वकील) तो अवकाश में काम ही नहीं करना चाहते।
उन्होंने आगे कहा कि न्यायपालिका लगातार अपने स्तर पर काम कर रही है, लेकिन जब वकील ही अवकाश के दौरान मामलों को आगे नहीं बढ़ाना चाहते, तो इसका असर न्याय प्रक्रिया पर पड़ता है और इसके लिए फिर अदालतों को ही दोषी ठहराया जाता है। CJI की यह टिप्पणी न्यायिक व्यवस्था में कार्य की गंभीरता और लंबित मामलों की चुनौती को लेकर थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की ओर से कोई कोताही नहीं है, लेकिन सभी पक्षों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी, तभी न्याय प्रक्रिया को सुचारु रूप से चलाया जा सकता है। इस टिप्पणी के बाद कानूनी समुदाय में एक नई बहस छिड़ गई है कि न्यायपालिका और बार (वकील) के बीच संतुलन और सहयोग कितना आवश्यक है, विशेषकर छुट्टियों जैसे संवेदनशील समय में।
