HPV एवं कैंसर जागरूकता संगोष्ठी आयोजित
कैंसर की रोकथाम, प्रारंभिक पहचान एवं HPV टीकाकरण के प्रति जागरूकता पर दिया जोर
लखनऊ। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ फार्मेसी में "आनंदी माँ – एक जीवन बचाओ अभियान (कैंसर मुक्त भारत यात्रा) 2026-27" के तहत HPV एवं कैंसर जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम कुलपति प्रो. अजय तनेजा के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
50 से अधिक महिला शिक्षकों व छात्राओं ने की सहभागिता
संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों की 50 से अधिक महिला शिक्षकों एवं छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम में अर्चिता तिवारी ने स्तन कैंसर तथा डॉ. अमृता यादव ने गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। विशेषज्ञों ने कैंसर के प्रमुख लक्षणों, जोखिम कारकों, बचाव के उपायों, नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर पहचान व उपचार के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में HPV वैक्सीनेशन की भूमिका पर भी प्रतिभागियों को जागरूक किया गया।
"जागरूकता और समय पर जांच सबसे प्रभावी हथियार" — कुलपति
कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ाई में जागरूकता, समय पर जांच और वैज्ञानिक जानकारी सबसे प्रभावी हथियार हैं। उन्होंने बताया कि महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े कैंसर के मामलों में प्रारंभिक पहचान जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाती है, इसलिए HPV संक्रमण से जुड़े सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए टीकाकरण और नियमित स्क्रीनिंग जरूरी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का दायित्व केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को स्वस्थ व जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है, और ऐसे जन-जागरूकता कार्यक्रम इसी दिशा में अहम कदम हैं।
प्रो. तनेजा ने आयोजकों व प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य जागरूकता को शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
कार्यक्रम का उद्देश्य और आयोजन टीम
संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय परिवार में कैंसर की रोकथाम, प्रारंभिक पहचान, नियमित स्वास्थ्य जांच तथा HPV टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यक्रम के जरिए यह संदेश दिया गया कि सही जानकारी, समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह से कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है।
कार्यक्रम का आयोजन प्रो. शालिनी त्रिपाठी एवं डॉ. नलिनी मिश्रा के निर्देशन में हुआ। इसे सफल बनाने में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, विद्यार्थियों व सहयोगी सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
