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अस्पतालों में आशा कक्ष: आशा वर्कर्स को मिलेगी विश्राम व पेयजल सुविधा

यूपी के जिला व महिला चिकित्सालयों में आशा कार्यकर्ताओं के लिए अलग 'आशा कक्ष' बनेगा। NHM मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने जारी किए निर्देश।
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Shivam Srivastava
  • Updated: October 8, 2026

अब अस्पतालों में आशाओं को मिलेगा अपना 'आशा कक्ष', बैठने-विश्राम और पेयजल की मिलेगी सुविधा

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने जारी किए दिशा-निर्देश, कक्ष में बिजली, पंखा और पेयजल अनिवार्य

लखनऊ। प्रदेश के चिकित्सालयों में कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं के लिए अब अलग से 'आशा कक्ष' की व्यवस्था की जाएगी। मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), डॉ. पिंकी जोवल ने 3 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

आदेश के तहत चिकित्सा विद्यालयों, चिकित्सा संस्थानों, स्वास्थ्य केंद्रों तथा सभी जिला एवं महिला संयुक्त चिकित्सालयों में आशाओं के बैठने और विश्राम के लिए एक अतिरिक्त कक्ष उपलब्ध कराया जाएगा।

✅ आशा कक्ष में क्या-क्या मिलेगा

  • कक्ष के बाहर स्पष्ट अक्षरों में 'आशा कक्ष' लिखा होगा
  • नियमित विद्युत आपूर्ति और पंखे की व्यवस्था
  • पेयजल की सुविधा
  • विश्राम के लिए आवश्यक संसाधन

🗣️ क्यों पड़ी इसकी जरूरत

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जेएन तिवारी ने बताया कि ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में आशाओं के माध्यम से सरकार की स्वास्थ्य सेवाएं जन-जन तक पहुंच रही हैं। कार्य के सिलसिले में उन्हें अक्सर चिकित्सालयों में आना पड़ता है और कई बार वहां रुकना भी पड़ता है। ऐसे में अलग स्थान की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

📜 पहले भी जारी हुआ था आदेश, पर नहीं हुआ पालन

जेएन तिवारी के अनुसार, इस संबंध में 4 मार्च 2025 को शासनादेश जारी हुआ था, लेकिन कई जनपदों में इसका अनुपालन नहीं हो रहा था। आशा हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष कुसुम लता यादव ने यह समस्या राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के सामने रखी। इसके बाद परिषद ने लगातार पत्राचार कर कक्ष आवंटन की मांग उठाई, जिसके परिणामस्वरूप अब नए निर्देश जारी हुए हैं।

💬 प्रतिक्रियाएं

अरुणा शुक्ला, महामंत्री, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद:
"महिला कर्मचारियों की कार्यस्थल संबंधी आवश्यकताएं कई मामलों में अलग होती हैं। आशाओं को सुरक्षित स्थान पर बैठने, विश्राम करने और मरीजों से बातचीत करने के लिए अलग स्थान मिलना जरूरी है। यह महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिससे आशाओं को कार्यस्थल पर सम्मान और सुविधाएं दोनों मिलेंगी।"

कुसुम लता यादव, प्रदेश अध्यक्ष, आशा हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन:
उन्होंने मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवल के प्रति आभार जताते हुए कहा कि लंबे समय से चली आ रही इस समस्या के समाधान से प्रदेश की हजारों आशा कार्यकर्ताओं को लाभ मिलेगा।

 

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