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आंबेडकर व हेडगेवार का जीवन हिंदू समाज की एकता को समर्पित रहा – डॉ. भागवत

कानपुर
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Kanwhiz Times
  • Updated: April 14, 2025

कैनविज टाइम्स,डिजिटल डेस्क। यह बयान डॉ. मोहन भागवत ने जो कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं, वे समाज के दृष्टिकोण को नया और विचारशील रूप देती हैं। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के बीच समानताएँ और उनके उद्देश्यों को उजागर किया।

भागवत जी का यह कहना कि डॉ. आंबेडकर और डॉ. हेडगेवार दोनों का उद्देश्य समाज में समानता, एकता, और बंधुत्व की भावना को प्रोत्साहित करना था, यह दिखाता है कि दोनों ही महापुरुषों ने हिंदू समाज के सुधार और समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए अपने जीवन को समर्पित किया।

डॉ. आंबेडकर ने अपनी विचारधारा को बौद्ध धर्म से जोड़ा, लेकिन उन्होंने हमेशा हिंदू समाज में सुधार की दिशा में काम किया। संघ प्रमुख ने इस बात को भी रेखांकित किया कि डॉ. आंबेडकर के विचार "स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व" के विचारों से प्रेरित थे, जो वही विचारधारा है जिस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काम करता है।

1934 में डॉ. आंबेडकर का संघ शाखा में जाना और वहां अपनत्व का भाव व्यक्त करना इस बात को और प्रकट करता है कि हालांकि दोनों के विचारों में कुछ अंतर हो सकते थे, लेकिन उनके लक्ष्य और उद्देश्य में एकता थी। यह संघ और आंबेडकर के बीच एक सकारात्मक संवाद का प्रतीक है। इस संदर्भ में, डॉ. भागवत की यह बात बहुत महत्वपूर्ण है कि संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक "भावना और जीवन" है, जिसका उद्देश्य समाज को जोड़ना और सुधार करना है। क्या आपको लगता है कि समाज में इन विचारों को लेकर कोई भ्रम या विवाद हो सकता है, खासकर आंबेडकर के धर्म परिवर्तन को लेकर?

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