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आईआईटी मंडी में आत्महत्या रोकथाम के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

आईआईटी मंडी
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Kritika pandey
  • Updated: September 10, 2025

कैनविज टाइम्स, डिजिटल डेस्क ।

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर बुधवार काे आईआईटी मंडी के मार्गदर्शन एवं परामर्श सेल ने क्यूपीआर इंस्टीट्यूट इंडिया के सहयोग से एक दिवसीय आत्महत्या रोकथाम प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम छात्रों, संकाय और कर्मचारियों के भावनात्मक कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। संस्थान मानसिक रूप से लचीला और सहयोगी वातावरण बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। इस अवसर पर आयोजित गेटकीपर प्रशिक्षण कार्यक्रम क्यूपीआर पद्धति पर आधारित था, जिसमें "प्रश्न करें, समझाएं और निर्देशित करें" के सिद्धांत के तहत प्रतिभागियों को आत्महत्या के खतरे के संकेत पहचानने और समय पर प्रभावी हस्तक्षेप करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। क्यूपीआर पद्धति को सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) की तरह आत्महत्या संकट की स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया देने वाला उपाय माना जाता है। जैसे सीपीआर आम लोगों को हृदय गति रुकने की स्थिति में जीवन बचाने के लिए प्रशिक्षित करता है, वैसे ही क्यूपीआर आत्महत्या रोकने के लिए सशक्त बनाता है। कार्यक्रम में संस्थान के वार्डन, सहायक वार्डन, डीन कार्यालय के कर्मचारी, शैक्षणिक अनुभाग के कर्मचारी और विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों ने भाग लिया। ये सभी हितधारक छात्रों के साथ प्रतिदिन जुड़ते हैं और उनके शैक्षणिक व व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करते हैं। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य छात्रों और सहायता प्रणाली के बीच एक मजबूत सेतु बनाना, एक दयालु और सहयोगी वातावरण तैयार करना और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना था। आईआईटी मंडी के निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि छात्रों का कल्याण संस्थान की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता तभी संभव है जब छात्रों को भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य का पूरा समर्थन मिले। प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों को क्यूपीआर इंस्टीट्यूट की ओर से प्रमाण पत्र, आत्महत्या रोकथाम मैनुअल, वॉलेट कार्ड और भारत में आत्महत्या रोकथाम से जुड़े संसाधनों की सूची भी प्रदान की गई। गौरतलब है कि क्यूपीआर कार्यक्रम को एनआईएमएचएएनएस द्वारा वैज्ञानिक रूप से जांचा गया है और भारत सरकार द्वारा आत्महत्या रोकथाम कार्यशालाओं के लिए अनुशंसित किया गया है।

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