राज्य ब्यूरो, लखनऊ। सड़क निर्माण में घोटाला और काम में लापरवाही बरतने के आरोप में नौ जिलों के अभियंता अब लोक निर्माण विभाग के रडार पर आ गए हैं। इन अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इन अभियंताओं के नाम एक रिपोर्ट में शामिल हैं, जिसे लोक निर्माण विभाग के मुख्यालय भेजा गया है और जल्द ही यह रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
यह कार्रवाई मुख्यमंत्री द्वारा अक्टूबर में नई बनी सड़कों की जांच के आदेश देने के बाद शुरू हुई थी। मुख्यमंत्री, जो लोक निर्माण विभाग के मंत्री भी हैं, ने अधिकारियों को नई सड़कों की गुणवत्ता की जांच करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रमुख सचिव अजय चौहान, विभाग के सलाहकार वीके सिंह और तत्कालीन विभागाध्यक्ष योगेश पवार ने हरदोई सहित 10 जिलों में नई बनी सड़कों की जांच करवाई थी।
हरदोई में हुई जांच में चार सड़कों को गुणवत्ता के मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। प्रयोगशाला में इन सड़कों के नमूने भी फेल हो गए थे। इसके बाद शासन ने तत्काल प्रभाव से 16 अभियंताओं को निलंबित कर दिया था और सड़क निर्माण में लापरवाही बरतने के आरोप में ठेकेदारों से 30 करोड़ रुपये वसूलने का निर्णय लिया था।
इस मामले में अब विभागीय कार्रवाई को और तेज किया जा रहा है। निलंबन और वसूली के साथ-साथ अन्य अभियंताओं पर भी कड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसे घोटाले और लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो सके।
