कैनव्हिज़ टाइम्स,डिजिटल डेस्क। उत्तर प्रदेश के कई जिलों के किसान फिर से दिल्ली के बार्डर पर किसान आंदोलन में भाग लेने के लिए तैयार हो रहे हैं। इन किसानों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर पहले भी संघर्ष कर चुके हैं और अब भी उनका आंदोलन जारी रहेगा।
उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले से बड़ी संख्या में किसान दिल्ली कूच करने की तैयारी कर रहे हैं। मुज़फ्फरनगर जिले को किसान आंदोलन का एक प्रमुख गढ़ माना जाता है, क्योंकि यहां के किसान पिछले कुछ समय से कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय रहे हैं। किसान नेताओं का कहना है कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गईं, तो वे एक बार फिर से सड़क पर उतरेंगे और दिल्ली तक अपनी आवाज़ पहुंचाएंगे।
किसान नेता और कार्यकर्ता यह साफ कर रहे हैं कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन वे किसी भी स्थिति में अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि सरकार द्वारा लाए गए नए कृषि कानूनों से किसानों की स्थिति और भी खराब हो गई है, और इन कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर आंदोलन किया जाएगा।
पिछले आंदोलनों में, खासकर 2020-2021 के किसान आंदोलन में, मुज़फ्फरनगर के किसानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस दौरान, लाखों किसान दिल्ली की सीमाओं पर जमा हुए थे, और सरकार को अंततः कृषि कानूनों को वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा था।
किसान नेताओं का कहना है कि वर्तमान में भी किसानों की समस्याएं जस की तस हैं, और उन्हें उम्मीद है कि दिल्ली में होने वाला यह आंदोलन फिर से सरकार तक अपनी बात पहुंचाएगा। किसान यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि वे सिर्फ कृषि कानूनों की वापसी की नहीं, बल्कि किसानों के लिए बेहतर समर्थन मूल्य, फसल बीमा योजना और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी अपनी आवाज उठाएंगे।
आंदोलन का उद्देश्य:
• कृषि कानूनों की वापसी: किसान आंदोलन की सबसे बड़ी मांग इन कृषि कानूनों की वापसी है, जिनसे किसानों को मंडी व्यवस्था और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) जैसी बुनियादी सुरक्षा समाप्त होने का डर है।
• न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): किसानों का कहना है कि उन्हें अपनी फसल के लिए उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। सरकार से वे MSP पर कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं।
• किसानों की कर्जमाफी: कई किसान कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं और उनकी कर्जमाफी की भी प्रमुख मांग है।
किसान संगठनों का यह भी कहना है कि वे हर हाल में अपनी आवाज को सरकार तक पहुंचाएंगे, और यदि ज़रूरत पड़ी तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा।
आंदोलन में भाग लेने वाले किसान:
मुज़फ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर, बागपत, और अन्य आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में किसान दिल्ली के लिए रवाना होंगे। इन किसानों की यात्रा शुरू होने से पहले स्थानीय किसान संगठनों द्वारा तैयारी शुरू कर दी गई है। किसान दिल्ली में सीमा पर अपनी आवाज़ उठाने के लिए एकजुट होंगे, और इस आंदोलन का असर यूपी और दिल्ली के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों में भी महसूस हो सकता है।
किसानों के संदेश:
किसान नेताओं का कहना है, “हमने पहले भी संघर्ष किया है और हम आगे भी लड़ेंगे। यह हमारी ज़िन्दगी का सवाल है, और हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं।”
इस आंदोलन को लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन भी सतर्क है, ताकि किसी भी तरह की असहमति या विवाद की स्थिति न उत्पन्न हो।
