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चीन में बांध बनाने से असम में ब्रह्मपुत्र के इकोसिस्टम को पहुंचेगा नुकसान, सीएम सरमा ने खतरों को लेकर किया आगाह

चीन
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Kanwhizz Times
  • Updated: January 2, 2025

कैनविज टाइम्स,डिजिटल डेस्क।असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में चीन द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाने के संभावित खतरों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चीन की ओर से नदी पर बनाए गए या बनाने की योजना वाले बांध असम के ब्रह्मपुत्र के इकोसिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे न केवल राज्य की कृषि व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, बल्कि स्थानीय लोगों की जीवनशैली भी संकट में पड़ सकती है।

चीन का बांध निर्माण और असम पर प्रभाव

चीन ने हाल के वर्षों में ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपरी हिस्से में कई बांधों का निर्माण किया है या करने की योजना बनाई है। ब्रह्मपुत्र नदी जो तिब्बत से बहकर भारत, बांग्लादेश, और नेपाल से होकर जाती है, असम की जीवनरेखा मानी जाती है। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि चीन द्वारा नदी के जलप्रवाह को नियंत्रित करने की कोशिश से असम के किसानों, मछुआरों और स्थानीय समुदायों के लिए गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

ब्रह्मपुत्र नदी असम की कृषि और जल आपूर्ति का मुख्य स्रोत है, और यदि नदी के प्रवाह में कोई रुकावट या अवरोध उत्पन्न होता है, तो इससे राज्य के किसानों की सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और मछली पालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

प्राकृतिक आपदाओं का खतरा

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर चीन ब्रह्मपुत्र पर बड़े पैमाने पर बांध बनाएगा, तो इससे नदी के पानी का प्रवाह प्रभावित होगा, जिससे असम में बाढ़ और सूखा जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है। असम में हर साल मानसून के दौरान बाढ़ का खतरा बना रहता है, और अगर नदी का जल प्रवाह नियंत्रित किया जाता है, तो इससे बाढ़ की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन और भूमि क्षरण जैसे कारक पहले ही ब्रह्मपुत्र के इकोसिस्टम पर दबाव डाल रहे हैं, और चीन का बांध निर्माण असम के प्राकृतिक संसाधनों पर और अधिक बोझ डाल सकता है।

भारत और चीन के बीच जल विवाद

मुख्यमंत्री सरमा ने भारत और चीन के बीच जल विवाद की गंभीरता को भी रेखांकित किया। उनका कहना है कि ब्रह्मपुत्र नदी का पानी साझा संसाधन है और चीन का एकतरफा निर्णय न केवल असम, बल्कि भारत के अन्य हिस्सों और बांग्लादेश के लिए भी खतरनाक हो सकता है। ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन के नियंत्रण और बांधों की योजनाओं से जल बंटवारे और पर्यावरणीय संकट को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत की आवश्यकता है।

नदी के पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए कदम

सीएम सरमा ने भारत सरकार से इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि असम सरकार इस मुद्दे को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए तैयार है। असम में ब्रह्मपुत्र नदी के पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं, जिसमें नदी के जलप्रवाह पर अध्ययन, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का आकलन और तटीय क्षेत्रों की रक्षा के उपाय शामिल हैं।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने चीन द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाने से असम के पारिस्थितिकी तंत्र को होने वाले नुकसान की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य की कृषि, जल आपूर्ति, और स्थानीय लोगों की जीवनशैली पर गंभीर असर पड़ सकता है। इस मुद्दे पर भारत सरकार को कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि ब्रह्मपुत्र नदी का पारिस्थितिकी तंत्र सुरक्षित रहे और इस पर विवाद को शांतिपूर्वक हल किया जा सके।

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