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प्रधानमंत्री मोदी की सुदृढ़ कूटनीति से भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत

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  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Dhirendra Mishra
  • Updated: July 23, 2025

नई दिल्ली/लखनऊ, कैनविज टाइम्स संवाददाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संतुलित और दूरदर्शी विदेश नीति ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत न केवल अपने पड़ोसी देशों के साथ भरोसेमंद साझेदार के रूप में खड़ा है, बल्कि संकट के समय में भी स्थिरता और सहयोग की मिसाल पेश करता है। मालदीव और श्रीलंका के साथ भारत के हालिया संबंध इस रणनीतिक धैर्य और सकारात्मक कूटनीति का सशक्त उदाहरण हैं। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू, जो दो साल पहले 'इंडिया आउट' जैसे नारों के साथ सत्ता में आए थे, प्रधानमंत्री मोदी को अपने देश के 60वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का मुख्य अतिथि बना रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी इस सप्ताह मालदीव की राजकीय यात्रा पर जाने वाले पहले विदेशी नेता बनेंगे। यह एक प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक क्षण है जो दर्शाता है कि कैसे भारत ने धैर्य, समझ और समयबद्ध सहयोग के माध्यम से एक जटिल रिश्ते को फिर से मजबूती प्रदान की। मुइज्जू के कार्यभार संभालने के बाद कई विश्लेषकों ने आशंका जताई थी कि भारत मालदीव को अपने भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के पक्ष में खो देगा। परंतु भारत ने न तो भावावेश में प्रतिक्रिया दी, न ही तात्कालिक लाभ के लिए कोई आक्रामक कूटनीति अपनाई। इसके बजाय प्रधानमंत्री मोदी ने मुइज्जू को सबसे पहले बधाई देने वाले वैश्विक नेता बनकर अपनी सदाशयता और राजनीतिक परिपक्वता का परिचय दिया। इस बीच, भारत ने मालदीव को 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर की आपातकालीन वित्तीय सहायता दी, 3,000 करोड़ रुपए की मुद्रा अदला-बदली की, 13 नए नौका सेवा समझौतों पर हस्ताक्षर किए और रक्षा व समुद्री सुरक्षा में सहयोग जारी रखा। भारत-मालदीव व्यापार 548 मिलियन डॉलर को पार कर गया है, जिसमें भारतीय पर्यटकों और निवेशकों की बड़ी भूमिका है। रक्षा और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में भी भारत ने मालदीव को प्राथमिकता दी है। भारतीय रक्षा अकादमियों में मालदीव के तटरक्षक और रक्षा अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब मुइज्जू ने नवंबर 2023 में राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के तुरंत बाद भारत को अपनी पहली विदेश यात्रा का गंतव्य बनाया था। इसी प्रकार की परिपक्व कूटनीति श्रीलंका के साथ भी देखने को मिली। जब वामपंथी झुकाव वाले अनुरा कुमारा दिसानायके ने राष्ट्रपति पद संभाला, तो कयास लगाए गए कि भारत-श्रीलंका संबंधों में तनाव आ सकता है। परंतु हुआ इसके ठीक विपरीत। प्रधानमंत्री मोदी श्रीलंका की नई सरकार के शपथ ग्रहण के बाद वहां की राजकीय यात्रा करने वाले पहले विदेशी नेता बने। उन्हें श्रीलंका के सर्वोच्च नागरिक सम्मान मित्र विभूषण से नवाजा गया और राष्ट्रपति दिसानायके ने भारत को “श्रीलंका का सबसे करीबी और भरोसेमंद साझेदार” बताया। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट किया है कि भारत की विदेश नीति केवल तात्कालिक प्रतिक्रिया पर आधारित नहीं, बल्कि दीर्घकालिक स्थिरता और विश्वास पर आधारित है। यह दृष्टिकोण भारत की वैश्विक उपस्थिति को सशक्त करता है और उसे एक ऐसे राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करता है जो सिद्धांत और व्यावहारिकता के बीच संतुलन बनाए रखता है। प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति की यही विशेषता है – जब दुनिया में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही हो, तब भी भारत अपनी पड़ोसी और मित्र राष्ट्रों के साथ भरोसे और सहयोग की डोर बनाए रखता है।

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