कैनविज टाइम्स,डिजिटल डेस्क। बिहार में बीपीएससी छात्रों का विरोध प्रदर्शन अब सिर्फ एक शिक्षा और रोजगार का मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि यह एक सियासी विवाद का रूप ले चुका है। हाल ही में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी इस आंदोलन में अपने हाथ आजमाने की कोशिश करते नजर आए, लेकिन उनके बयान ने उन्हें आलोचनाओं के घेरे में ला खड़ा किया।
क्या था मामला?
बीपीएससी छात्र आंदोलन के बीच प्रशांत किशोर ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी, लेकिन उनके बयान को लेकर छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने कहा था कि इस आंदोलन को राजनीतिक रूप से भड़काना सही नहीं है, और छात्रों को शांतिपूर्वक अपने मुद्दे उठाने चाहिए। हालांकि, प्रशांत किशोर का यह बयान बीपीएससी छात्रों को बिल्कुल पसंद नहीं आया। उनका कहना था कि किशोर ने उनके संघर्ष को समझे बिना ही बयान दिया और उनकी जायज मांगों का मजाक उड़ाया। इस प्रतिक्रिया ने प्रशांत किशोर को छात्रों के निशाने पर ला खड़ा किया।
आलोचनाओं का सामना:
प्रशांत किशोर का यह बयान बुरी तरह से पलट गया, क्योंकि छात्रों ने इसे उनकी राजनीति और चुनावी रणनीति का हिस्सा माना। उन्हें अब इस आंदोलन के संदर्भ में छात्र समुदाय से कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों का कहना था कि वे अपनी मांगों को लेकर गंभीर हैं और किशोर को इस पर राजनीति नहीं करनी चाहिए थी। प्रशांत किशोर ने इस आंदोलन में हस्तक्षेप करने की कोशिश की थी, लेकिन उनका बयान उल्टा पड़ गया और उन्हें झुलसने का सामना करना पड़ा। यह मामला अब बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ले चुका है, और देखना होगा कि आगे चलकर यह सियासी विवाद क्या नया मोड़ लेता है।
