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बिहार में भजन को लेकर विवाद: मैं अटल रहूंगा कार्यक्रम में गाया ईश्वर-अल्लाह तेरो नाम, लोकगायिका ने मांगी माफी

बिहार
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Kanwhizz Times
  • Updated: December 26, 2024

कैनविज टाइम्स,डिजिटल डेस्क। बिहार में एक भजन को लेकर विवाद छिड़ गया है, जब प्रसिद्ध लोकगायिका ने 'मैं अटल रहूंगा' कार्यक्रम के दौरान भजन ‘ईश्वर-अल्लाह तेरो नाम’ गाया। इस भजन को लेकर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला करार दिया। इसके बाद गायिका ने सोशल मीडिया पर माफी मांगी और यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था।

विवाद की शुरुआत:
यह विवाद तब शुरू हुआ जब बिहार के एक कार्यक्रम ‘मैं अटल रहूंगा’ में लोकगायिका ने मशहूर भजन ‘ईश्वर-अल्लाह तेरो नाम’ गाया। यह भजन हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देने वाला है और इसे प्रसिद्ध गायक महेंद्र कपूर ने गाया था। हालांकि, कार्यक्रम के बाद कुछ धार्मिक समूहों ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि यह भजन इस कार्यक्रम के संदर्भ में उपयुक्त नहीं था। उन्होंने दावा किया कि भजन में ‘ईश्वर’ और ‘अल्लाह’ के शब्दों का एक साथ इस्तेमाल किया गया है, जो कुछ लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है।

गायिका ने दी माफी:
विवाद के बाद गायिका ने सोशल मीडिया पर माफी मांगते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी धर्म को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस भजन को सिर्फ एकता और भाईचारे के संदेश के रूप में गाया था और अगर उनके गाने से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची है तो वह इसके लिए खेद प्रकट करती हैं। गायिका ने यह भी कहा कि उन्होंने कभी भी धार्मिक मुद्दों को लेकर विवाद खड़ा करने का इरादा नहीं किया था।

सामाजिक मीडिया पर प्रतिक्रिया:
इस विवाद के बाद सोशल मीडिया पर भी गर्मा-गर्मी बढ़ गई। कुछ लोग गायिका का समर्थन करते हुए कहते हैं कि भजन का उद्देश्य केवल भाईचारे का संदेश देना था, जबकि कुछ लोग इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के रूप में देख रहे थे। विवाद ने एक बार फिर धार्मिक विविधता और भारत की सांस्कृतिक एकता को लेकर बहस को हवा दी है।इस घटना ने बिहार में एक नई बहस को जन्म दिया है, जहां धार्मिक भावनाओं का सम्मान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्देश्य दोनों की बात की जा रही है। गायिका ने माफी मांगकर मामले को शांत करने की कोशिश की, लेकिन इस विवाद ने यह दिखा दिया है कि सांस्कृतिक और धार्मिक संवेदनशीलता को हमेशा ध्यान में रखना जरूरी है।

 

 

 

 

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