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बीबीएयू लखनऊ में ईईजी कार्यशाला, ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस पर चर्चा

लखनऊ के बीबीएयू में 'ब्रेन पोटेंशियल: द ईईजी वर्कशॉप' आयोजित। विशेषज्ञों ने ईईजी, न्यूरोसाइंस और ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस की जानकारी दी।
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Shivam Srivastava
  • Updated: October 7, 2026

बीबीएयू में ईईजी कार्यशाला: न्यूरोसाइंस और ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस पर विशेषज्ञों ने साझा की जानकारी

योग विभाग की एक दिवसीय कार्यशाला में चार तकनीकी सत्र, प्रतिभागियों को मिले प्रमाण-पत्र

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में मंगलवार को स्कूल ऑफ योग, नेचुरोपैथी एंड कॉग्निटिव स्टडीज के योग विभाग की ओर से 'ब्रेन पोटेंशियल: द ईईजी वर्कशॉप' विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विशेषज्ञों ने मस्तिष्क संकेतों, इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ईईजी), इवोक्ड पोटेंशियल्स, इवेंट-रिलेटेड पोटेंशियल्स और ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (बीसीआई) के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक अनुप्रयोगों की जानकारी दी।

कार्यशाला के मुख्य अतिथि मैगस्टिम ईजीआई, अमेरिका के डॉ. सुहास विंचुरकर रहे। इस अवसर पर योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दीपेश्वर सिंह, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एआई, बीबीएयू की समन्वयक प्रो. बबिता पाण्डेय और डॉ. नवीन जी.एच. समेत शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।

न्यूरोसाइंस में बढ़ रहा ईईजी का महत्व

डॉ. सुहास विंचुरकर ने कहा कि ईईजी तकनीक मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों और विभिन्न संकेतों को वैज्ञानिक ढंग से समझने में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में इन तकनीकों का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। इनके जरिए मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को समझने के साथ शोध, शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और वास्तविक जीवन के कई क्षेत्रों में नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अत्याधुनिक न्यूरोसाइंस तकनीकों की व्यावहारिक समझ देने का प्रभावी माध्यम हैं। साथ ही उन्होंने ईईजी के वैज्ञानिक और जिम्मेदार उपयोग, न्यूरल प्राइवेसी, सूचित सहमति और नैतिक पहलुओं के प्रति जागरूकता पर जोर दिया।

सुरक्षित और दर्दरहित तकनीक है ईईजी

विभागाध्यक्ष डॉ. दीपेश्वर सिंह ने कहा कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को समझना और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना आज की प्रमुख प्राथमिकताओं में है। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी सुरक्षित, गैर-आक्रामक और दर्दरहित तकनीक है, जिससे मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों में होने वाले बदलाव उच्च समय-रिजॉल्यूशन के साथ रिकॉर्ड किए जाते हैं। उन्होंने डेल्टा, थीटा, अल्फा और बीटा जैसी मस्तिष्क तरंगों के महत्व की जानकारी भी दी।

चार तकनीकी सत्रों में मिला प्रशिक्षण

कार्यशाला में कुल चार तकनीकी सत्र हुए:

  • पहला सत्र: ईईजी के मूलभूत सिद्धांत और मस्तिष्क संकेत
  • दूसरा सत्र: न्यूरोनल कंडक्शन और एक्शन पोटेंशियल्स
  • तीसरा सत्र: इवोक्ड पोटेंशियल्स, इवेंट-रिलेटेड पोटेंशियल्स और सामाजिक विज्ञान में इनके शोध अनुप्रयोग
  • चौथा सत्र: ईईजी का व्यावहारिक प्रदर्शन और विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी

प्रतिभागियों को ईईजी एवं ईआरपी डेटा के अधिग्रहण, मस्तिष्क की कार्यप्रणाली के संकेतकों की पहचान, डेटा विश्लेषण प्रोटोकॉल, बीसीआई और न्यूरोमॉड्यूलेशन के अनुप्रयोग तथा प्रयोगशाला व फील्ड के लिए उपकरणों के चयन पर प्रशिक्षण दिया गया। बीसीआई में नैतिकता, न्यूरल प्राइवेसी, सूचित सहमति और सुरक्षा जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और उन्हें ईईजी प्रशिक्षण के प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ. कंचन यादव सहित अन्य शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

 

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