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यूपीएसआईएफएस में क्वांटम टेक्नोलॉजी पर स्टेज प्रेजेंटेशन

लखनऊ के यूपीएसआईएफएस में छात्रों ने क्वांटम कंप्यूटिंग से ट्रैफिक समस्या के समाधान और फॉरेंसिक में QRNG के उपयोग पर प्रस्तुति दी। डॉ. गोस्वामी ने रखी राय।
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Shivam Srivastava
  • Updated: October 8, 2026

यूपीएसआईएफएस में क्वांटम टेक्नोलॉजी पर स्टेज प्रेजेंटेशन, छात्रों ने बताया क्वांटम कंप्यूटिंग से कैसे सुलझेगी ट्रैफिक समस्या

लॉ, बीटेक और एमटेक के विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों के सामने रखीं प्रस्तुतियां, ट्रैफिक कंजेशन और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षा पर रहा फोकस

लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) में क्वांटम टेक्नोलॉजी पर स्टेज प्रेजेंटेशन का आयोजन हुआ। इसमें संस्थान के लॉ, बीटेक और एमटेक के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। छात्र समूहों ने क्वांटम कंप्यूटिंग के जरिए यातायात समस्या के समाधान और फॉरेंसिक क्षेत्र में क्वांटम तकनीक के उपयोग पर विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुतियां दीं।

छात्रों की प्रस्तुति

प्रस्तुति के दौरान प्रथम टीम ने जी-7 समिट का उदाहरण देते हुए डी-वेव एनीलर, AWS क्लाउड और QUBO मॉडल के माध्यम से स्मार्ट रूट ऑप्टिमाइजेशन की जानकारी दी। वहीं, दूसरी टीम 'QuBee' ने क्वांटम रैंडम नंबर जनरेशन की तकनीक प्रस्तुत की।

छात्रों ने सुरक्षा और रियल-टाइम रूट निर्धारण, TLS 1.3 एन्क्रिप्शन तथा GDPR के अनुरूप डेटा सुरक्षा के पहलुओं पर भी प्रकाश डाला। साथ ही भविष्य में एम्बुलेंस, पुलिस और फॉरेंसिक सेवाओं के लिए प्राथमिकता वाले ट्रैफिक रूट तैयार करने की संभावनाएं बताईं।

प्रस्तुति में फोटोनिक आधारित क्वांटम रैंडम नंबर जनरेटर (QRNG) के माध्यम से क्यूबिट्स (0 और 1) जनरेट करने की प्रक्रिया भी दिखाई गई। छात्रों ने बताया कि QRNG जैसी तकनीक का उपयोग फॉरेंसिक डेटा एन्क्रिप्शन, डेटा इंटीग्रिटी और डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण में किया जा सकता है।

🗣️ विशेषज्ञ की सराहना

विषय विशेषज्ञ डॉ. पवन शर्मा (आईटी विशेषज्ञ, अमेरिका) ने छात्रों के तकनीकी ज्ञान और प्रस्तुति की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्थान में छात्रों को जिस तरह का तकनीकी वातावरण दिया जा रहा है, वह काबिले तारीफ है। छात्रों ने तकनीक के क्षेत्र में अपनी पकड़ और दक्षता का प्रदर्शन किया है।

💬 संस्थापक निदेशक का वक्तव्य

संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से छात्रों का ज्ञानवर्धन होता है और उन्हें दुनिया में हो रहे नवीन तकनीकी प्रयोगों से रूबरू होने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि क्वांटम टेक्नोलॉजी और फॉरेंसिक साइंस के समन्वय से भविष्य में फॉरेंसिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। क्वांटम क्रिप्टोग्राफी और क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में संस्थान अग्रणी होकर कार्य कर रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि क्वांटम तकनीक से 'ट्रैफिक कंजेशन' जैसी गंभीर समस्या के समाधान की दिशा में काम किया जा सकता है। स्मार्ट रूट ऑप्टिमाइजेशन से वाहनों का आइडल टाइम घटने पर ईंधन खपत और कार्बन उत्सर्जन कम करने तथा ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

👥 उपस्थित गणमान्य

इस अवसर पर अपर निदेशक संजीव सुमन, उप निदेशक चिरंजीव मुखर्जी, अतुल यादव, डॉ. निमिशा, डॉ. सेंथिल शिवासुब्रमण्यम, जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी सहित अन्य फैकल्टी सदस्य उपस्थित रहे।

 

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