• यूपी डायबिटीज एसोसिएशन के रजत जयंती समारोह का शुभारंभ, ‘लंग एंड डायबिटीज’ पुस्तक का विमोचन
लखनऊ, कैनविज टाइम्स संवाददाता। उत्तर प्रदेश डायबिटीज एसोसिएशन के रजत जयंती समारोह का शनिवार को ताज पैलेस में उद्घाटन हुआ। कार्यक्रम में मधुमेह के बदलते स्वरूप, उपचार की आधुनिक पद्धतियों और बुजुर्ग मरीजों के सामने आ रही चुनौतियों पर चर्चा की गई। समारोह के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, सैफई के कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह रहे। इस अवसर पर प्रो. नरसिंह वर्मा, प्रो. अजय वर्मा, डॉ. शिवम वर्मा, डॉ. मिली सेंगर और डॉ. पूजा कनोडिया द्वारा लिखित पुस्तक ‘लंग एंड डायबिटीज’ का विमोचन किया गया। वहीं, चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रो. नरसिंह वर्मा को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में 10 चिकित्सकों को मेडिकल केयर एक्सीलेंस अवार्ड प्रदान किए गए। इनमें डॉ. अजय तिवारी, डॉ. पीयूष खेरा, डॉ. आदित्य कपूर, डॉ. मुकुलेश गुप्ता, डॉ. मनोज कुमार श्रीवास्तव, डॉ. अभिषेक अरुण और डॉ. समीर गुप्ता प्रमुख रूप से शामिल रहे।

समारोह के वैज्ञानिक सत्र में विशेषज्ञों ने मधुमेह से जुड़ी कई अहम जानकारियां साझा कीं। आरएसएसडीआई के अध्यक्ष-इलेक्ट डॉ. सुनील गुप्ता ने बताया कि लिवर में इंसुलिन रेजिस्टेंस खाली पेट रक्त शर्करा बढ़ने का प्रमुख कारण है। इस स्थिति को समझना मधुमेह के बेहतर प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है। पुणे के डॉ. संजय अग्रवाल ने बुजुर्ग मधुमेह रोगियों में मांसपेशियों के क्षय के बढ़ते खतरे पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस विषय को वजन घटाने वाली दवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया। विशेषज्ञों के अनुसार, बुजुर्ग मरीजों में वजन कम करने के साथ मांसपेशियों की मजबूती और शारीरिक क्षमता बनाए रखना भी जरूरी है। वहीं, जयपुर से आए आरएसएसडीआई के सचिव डॉ. राकेश पारिख ने डायबिटिक रिमिशन की अवधारणा पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि तेजी से वजन घटाने से कुछ मरीजों में मधुमेह को नियंत्रित करने या रिमिशन की स्थिति हासिल करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसे बीमारी का स्थायी अंत नहीं मानना चाहिए। रिमिशन की स्थिति में भी नियमित जांच, जीवनशैली में सुधार और चिकित्सकीय निगरानी जरूरी है। समारोह में विशेषज्ञों ने मधुमेह की रोकथाम, बेहतर उपचार और मरीजों के जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।

