कैनविज टाइम्स, डिजिटल डेस्क ।
भारत के परमाणु कार्यक्रम को नई दिशा देने वाले देश के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एम.आर. श्रीनिवासन का मंगलवार को 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया। ऊटी में उन्होंने अंतिम सांस ली। डॉ. श्रीनिवासन ने भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में दशकों तक महत्वपूर्ण योगदान दिया और उन्हें डॉ. होमी जहांगीर भाभा के साथ काम करने का गौरव प्राप्त हुआ। 1955 में मात्र 25 वर्ष की उम्र में उन्होंने मुंबई स्थित भारतीय परमाणु प्रतिष्ठान में कार्यभार संभाला। उसी दौरान उन्हें भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक माने जाने वाले डॉ. होमी भाभा के साथ काम करने का अवसर मिला। डॉ. भाभा के मार्गदर्शन में वे देश के पहले परमाणु अनुसंधान रिएक्टर ‘अप्सरा’ के विकास से जुड़े, जो अगस्त 1956 में पूरी तरह तैयार हुआ।
डॉ. श्रीनिवासन की पहचान एक दूरदर्शी वैज्ञानिक के रूप में रही है, जिन्होंने न केवल भाभा की योजनाओं को साकार किया, बल्कि उनके निधन के बाद भी उस दिशा को आगे बढ़ाया। 24 जनवरी 1966 को जब डॉ. भाभा की विमान दुर्घटना में मृत्यु हुई, तब उनकी बनाई योजनाओं को आगे ले जाने की जिम्मेदारी डॉ. श्रीनिवासन जैसे वैज्ञानिकों ने ही संभाली। डॉ. श्रीनिवासन बाद में परमाणु ऊर्जा आयोग (Atomic Energy Commission) के सदस्य और अध्यक्ष भी बने। उनके कार्यकाल में भारत के नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम को मजबूती मिली और कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं सफलतापूर्वक आगे बढ़ीं। विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में उनके योगदान को देश हमेशा याद रखेगा।
उनके निधन से वैज्ञानिक समुदाय में शोक की लहर है। उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए देश के कई वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने कहा कि उन्होंने भारत को नाभिकीय ऊर्जा की दिशा में आत्मनिर्भर बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई थी। डॉ. एम.आर. श्रीनिवासन का जाना एक युग का अंत है, लेकिन उनका विज्ञान में योगदान हमेशा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
