कैनवीज टाइम्स/डिजिटल डेस्क/लखनऊ। प्रयागराज में एम्स की स्थापना को लेकर करछना के सांसद उज्जवल रमण सिंह ने आज लोकसभा में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा दाखिल हलफनामा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, जिसमें कहा गया है कि अगले दो साल तक प्रयागराज में एम्स की स्थापना का कोई विचार नहीं है।
सांसद प्रतिनिधि विनय कुशवाहा ने बताया कि सांसद उज्जवल रमण सिंह ने लोकसभा में कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने 27 अगस्त 2017 को प्रयागराज में एम्स की स्थापना की घोषणा की थी और इसके लिए 200 एकड़ जमीन की तलाश नैनी और शंकरगढ़ इलाके में की गई थी। हालांकि हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए हलफनामे से संगम नगरवासियों का एम्स स्थापित करने का सपना चकनाचूर हो गया।
सांसद ने यह भी कहा कि प्रयागराज में पिछले दस वर्षों में अत्यधिक जनसंख्या वृद्धि हुई है, जबकि चिकित्सा सेवाएं अब भी बहुत कमजोर हैं। यहां पर आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी है, और इसके बावजूद एम्स की स्थापना के लिए सही तरीके से जमीनी हकीकत का आकलन नहीं किया गया है। सांसद ने यह भी बताया कि सिर्फ प्रयागराज ही नहीं, बल्कि इसके आसपास के जिले और मध्यप्रदेश के कुछ जिले भी प्रभावित हैं।
उन्होंने कहा कि गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को लखनऊ और दिल्ली का चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि धन की भी काफी हानि होती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस मुद्दे पर शीघ्र ध्यान दिया जाए और प्रयागराज में एम्स की स्थापना के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
