कैनविज टाइम्स,डिजिटल डेस्क। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर एक तीखा हमला किया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि अगर भाजपा हरियाणा में इमामों को 16 हजार रुपये सैलरी देती है, तो वही पार्टी दिल्ली में पुजारियों और ग्रंथियों के वेतन का विरोध क्यों कर रही है। संजय सिंह ने यह सवाल उठाते हुए भाजपा पर धर्मनिरपेक्षता के नाम पर दोगलेपन का आरोप लगाया और इसे राजनीतिक चाल के रूप में देखा।
संजय सिंह का आरोप
संजय सिंह ने अपने बयान में कहा कि भाजपा का धार्मिक तुष्टीकरण का रवैया हमेशा से देखने को मिलता रहा है, लेकिन जब दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार पुजारियों और ग्रंथियों के वेतन को लेकर कदम उठाती है, तो भाजपा इसका विरोध करती है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर क्यों भाजपा हरियाणा में इमामों के वेतन की घोषणा करती है और उसी समय दिल्ली में पुजारियों और धार्मिक ग्रंथियों के वेतन का विरोध करती है? दिल्ली सरकार ने हाल ही में पुजारियों और ग्रंथियों के वेतन को बढ़ाने की योजना बनाई थी। इसके तहत सरकार ने पुजारियों, ग्रंथियों और मौलवियों के वेतन में वृद्धि करने का प्रस्ताव रखा था, जिससे इन धार्मिक कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सके। लेकिन भाजपा ने इसका विरोध किया और इसे सांप्रदायिक राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि यह एक राजनीतिक चाल है, जिससे सरकार अपनी छवि को सुधारने की कोशिश कर रही है।
हरियाणा में इमामों को सैलरी देने का विवाद
हरियाणा सरकार ने 2017 में इमामों और मौलवियों को हर महीने 16,000 रुपये की सैलरी देने का ऐलान किया था। यह फैसला भाजपा की सरकार द्वारा लिया गया था, और इसे एक कदम के रूप में देखा गया था, जिससे मुसलमानों के बीच पार्टी की प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही थी। भाजपा द्वारा इमामों के वेतन की घोषणा का कई मुस्लिम संगठनों ने स्वागत किया था, लेकिन इसे सांप्रदायिक वोट बैंक के लिए एक राजनीतिक कदम के रूप में भी देखा गया।
संजय सिंह का विरोध
संजय सिंह ने भाजपा के इस दोगलेपन पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा हरियाणा में इमामों को सैलरी देती है तो वही पार्टी दिल्ली में पुजारियों और ग्रंथियों के वेतन को बढ़ाने की योजनाओं का विरोध क्यों कर रही है? उनका कहना था कि यह धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन है और भाजपा केवल वोट बैंक की राजनीति कर रही है। भाजपा की तरफ से दिल्ली सरकार के प्रस्ताव को लेकर कहा गया कि यह केवल सांप्रदायिक राजनीति का हिस्सा है, और यह दिल्ली के लोगों के हित में नहीं है। भाजपा के नेताओं का कहना है कि सरकार को अपने फैसलों में विभाजनकारी राजनीति से बचना चाहिए और राज्य के सभी धर्मों के लोगों के लिए काम करना चाहिए, न कि किसी विशेष वर्ग या समुदाय को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसे कदम उठाए जाएं। यह मुद्दा राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण हो गया है, और इसे भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच धार्मिक और सांप्रदायिक राजनीति के एक ताजे विवाद के रूप में देखा जा सकता है। संजय सिंह के सवाल ने भाजपा के धर्मनिरपेक्षता के दावों पर सवाल उठाया है और इसे राजनीति से जोड़ते हुए इसे एक बडी बहस का विषय बना दिया है। आने वाले समय में यह विवाद और बढ़ सकता है, खासकर अगर दिल्ली सरकार पुजारियों और ग्रंथियों के वेतन वृद्धि पर आगे कोई कदम उठाती है।
