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हिंदी बने विज्ञान, तकनीक और रोजगार की भाषा: मानवेन्द्र सिंह

बीबीएयू लखनऊ में राजभाषा हिंदी उत्सव-2026 का समापन। विधान परिषद सभापति मानवेन्द्र सिंह बोले, हिंदी को AI, क्वांटम तकनीक और रोजगार से जोड़ना जरूरी।
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Shivam Srivastava
  • Updated: October 1, 2026

हिंदी साहित्य से आगे बढ़कर विज्ञान, तकनीक और रोजगार की भाषा बने हिंदी : मानवेन्द्र सिंह

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में हिंदी प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित राजभाषा हिंदी उत्सव-2026 का सोमवार को भव्य समापन हुआ। समापन समारोह में मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति मानवेन्द्र सिंह रहे। अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा ने की।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं सांसद डॉ. अशोक बाजपेई, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी के प्रो. मुन्ना तिवारी, कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह और कार्यक्रम संयोजक डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद विश्वविद्यालय कुलगीत का गायन हुआ। आयोजन समिति की ओर से अतिथियों को अंगवस्त्रम और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

हिंदी को AI, क्वांटम तकनीक और रोजगार से जोड़ना होगा: मानवेन्द्र सिंह

मुख्य अतिथि मानवेन्द्र सिंह ने कहा कि किसी राष्ट्र की भाषा उसके सोचने के तरीके को व्यक्त करती है और विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच संवाद का सशक्त माध्यम होती है। हिंदी की समृद्धि केवल साहित्यिक परंपरा में ही नहीं, बल्कि उसकी बोलियों और भाषाई विविधता में भी निहित है। उन्होंने कहा कि हिंदी के विकास के लिए साहित्यिक विरासत के साथ बोलियों और भाषाई विविधता को भी समान महत्व देना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी भाषा में साहित्य तो उपलब्ध हो, लेकिन रोजगार, ज्ञान और विज्ञान से जुड़ी पर्याप्त सामग्री एवं अवसर न हों, तो वह नई पीढ़ी से प्रभावी रूप से नहीं जुड़ पाएगी। इसलिए हिंदी को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, विज्ञान, डिजिटलाइजेशन और रोजगार से जोड़ना होगा। हिंदी को केवल अतीत की भाषा तक सीमित न रखकर भविष्य की सशक्त भाषा के रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है।

भारतीय भाषाओं के बीच समन्वय पर जोर

डॉ. अशोक बाजपेई ने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आचार-विचार और भावनाओं की अभिव्यक्ति की भाषा भी है। उन्होंने कहा कि हिंदी के प्रति गौरव की भावना के साथ उसके व्यापक स्वरूप को समझना जरूरी है। भाषायी विवादों से बचने और भारतीय भाषाओं के बीच समन्वय के लिए शैक्षणिक संस्थानों में हिंदी के साथ कम से कम एक अन्य भारतीय भाषा के अध्ययन को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। साथ ही वैज्ञानिक युग में हिंदी के वैज्ञानिक प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए।

कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा ने कहा कि भारत की पहचान उसकी भाषाई और सांस्कृतिक विविधता में निहित है। हिंदी को आगे बढ़ाने के साथ अन्य भारतीय भाषाओं का भी सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक से अधिक भारतीय भाषाओं का ज्ञान विद्यार्थियों और युवाओं के लिए उपयोगी है, इससे संवाद का दायरा बढ़ता है और विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृति, साहित्य और जीवन-मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा, रोजगार, संचार और व्यावसायिक क्षेत्रों में हिंदी का प्रयोग निरंतर बढ़ रहा है।

प्रो. मुन्ना तिवारी ने कहा कि हिंदीभाषी होने के बावजूद हम हिंदी को वह प्रतिष्ठा नहीं दिला पा रहे हैं, जिसकी वह हकदार है, इस पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हिंदी ने राष्ट्रीय चेतना के विकास और विभिन्न क्षेत्रों व समुदायों के बीच संवाद और समन्वय में अहम भूमिका निभाई है। हिंदी के प्रचार-प्रसार में कई गैर-हिंदीभाषी विद्वानों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने हिंदी की सहभाषाओं और अन्य भारतीय भाषाओं के सम्मान तथा सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

प्रतियोगिताओं के विजेता सम्मानित

बीबीएयू में 1 से 30 सितंबर 2026 तक राजभाषा हिंदी उत्सव के अंतर्गत श्रुतिलेख (सु-लेख), टिप्पणी एवं प्रारूपण, हिंदी टंकण, निबंध प्रतियोगिता और स्वरचित कविता पाठ सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेताओं को समापन समारोह में मुख्य अतिथि ने प्रमाण-पत्र, पदक और पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया।

इस मौके पर डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव द्वारा लिखित पुस्तक ‘लोकसाहित्य के विविध परिदृश्य’ का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम के अंत में आईक्यूएसी निदेशक प्रो. शिल्पी वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। मंच संचालन डॉ. रमेश चंद्र नैलवाल ने किया।

द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भी समापन

समारोह के दौरान ‘हिंदी के विकास में बोलियों का योगदान : वर्तमान परिप्रेक्ष्य एवं भविष्य की दिशा’ विषय पर आयोजित द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भी समापन हुआ। संगोष्ठी का आयोजन बीबीएयू के हिंदी प्रकोष्ठ, हिंदुस्तानी एकेडमी, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज और अखिल भारतीय साहित्य परिषद, अवध प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

इस अवसर पर हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष प्रो. रामपाल गंगवार, डॉ. रमेश चंद्र नैलवाल, डॉ. नमिता जैसल सहित विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।

 

 

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