• पार्थ गौतम फाउंडेशन ने बरेली में शुरू की पहल, पिछले साल 500 लोगों तक पहुंचाई थी मदद
लखनऊ, कैनविज टाइम्स संवाददाता। दिवाली की खुशियां हर घर तक पहुंचाने के उद्देश्य से पार्थ गौतम फाउंडेशन ने बरेली में ‘हर घर दिवाली’ अभियान 3.0 की शुरुआत की है। इस वर्ष अभियान के तहत 2,000 से अधिक लोगों तक त्योहार की खुशियां पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले वर्ष इस पहल के माध्यम से 500 लोगों को जोड़ा गया था। इस बार अभियान का दायरा चार गुना बढ़ाया गया है। पार्थ गौतम फाउंडेशन के संस्थापक एवं अध्यक्ष तथा इन्वर्टिस विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर पार्थ गौतम के नेतृत्व में चल रही यह पहल जरूरतमंद परिवारों को दिवाली की खुशियों से जोड़ने के साथ समाज में सेवा, संवेदनशीलता और आपसी सहयोग की भावना को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। फाउंडेशन का उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहे परिवारों को भी सम्मान के साथ त्योहार मनाने का अवसर उपलब्ध कराना है।
सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश
पार्थ गौतम ने कहा कि दिवाली रोशनी, उम्मीद और एकजुटता का पर्व है। इसकी सार्थकता तभी है, जब हम दूसरों के जीवन में भी खुशियां लाने का प्रयास करें। पिछले वर्ष अभियान के दौरान लोगों के चेहरों पर दिखी खुशी ने इस बार बड़े स्तर पर पहल करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन का प्रयास केवल त्योहार मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में जरूरतमंदों की मदद करने और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की संस्कृति विकसित करना भी है।
5,200 से अधिक लोगों तक पहुंची मदद
फाउंडेशन के अनुसार, पिछले एक वर्ष में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामुदायिक कल्याण से जुड़ी पहलों के माध्यम से 5,200 से अधिक लोगों को सहायता दी गई है। इनमें 4,000 से अधिक बच्चों को निश्शुल्क शिक्षा में सहयोग और 1,200 से अधिक लोगों को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना शामिल है। इसके अलावा फाउंडेशन की ओर से कंबल वितरण, चाय सेवा, भोजन सहायता और मौसमी कल्याण कार्यक्रम भी संचालित किए जाते हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों की तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ सामाजिक चुनौतियों के समाधान में योगदान देना है। ‘हर घर दिवाली’ अभियान के जरिए फाउंडेशन बरेली में सामाजिक सहभागिता और सेवा की भावना को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। लक्ष्य है कि त्योहार की खुशियां समाज के हर वर्ग तक पहुंचें और कोई भी परिवार आर्थिक कठिनाइयों के कारण दिवाली के उल्लास से वंचित न रहे।
