कैनविज टाइम्स,डिजिटल डेस्क।जमीन के बदले नौकरी घोटाला मामले में लालू यादव से पूछताछ जारी है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लालू यादव और उनके परिवार के सदस्यों से पूछताछ की प्रक्रिया को जारी रखा है। ये घोटाला बिहार में राज्य सरकार की नौकरी के बदले जमीन लेने के आरोप से जुड़ा हुआ है। ED दफ्तर के बाहर आरजेडी (RJD) समर्थकों की बड़ी संख्या में मौजूदगी देखी जा रही है। वे नारेबाजी कर रहे हैं और लालू यादव के समर्थन में विभिन्न आरोपों को गलत बताने की कोशिश कर रहे हैं। समर्थक इस प्रक्रिया को राजनीतिक साजिश और विपक्षी दलों का दवाब मानते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
लालू को सौंपी गई सवालों की सूची: सूत्र
ईडी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लालू प्रसाद को सवालों की एक सूची ईडी की टीम ने दी है। जिसपर जल्द ही उनसे जवाब लिए जाएंगे। पूछताछ लंबी चलने की बात कही जा रही है। इधर विधानसभा में जमीन के बदले नौकरी मामले में ईडी की पूछताछ पर भाजपा विधायक हरि भूषण ठाकुर बचौल ने कहा है कि पूरा माल दबा कर रखें हैं। चपरासी के क्वार्टर में रहते थे। आज महल में रहते हैं। कानून के तहत कार्रवाई हो रही है।
उन्होंने भाजपा पर साजिश का आरोप निरर्थक और बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद चारा घोटाला के समय जब कार्रवाई के शिकंजे में आए तब उस समय केंद्र में उनकी सरकार थी। देवेगौड़ा और गुजराल के शासनकाल में वे जेल गए।
उनकी ही पार्टी के वरीय नेता शिवानंद तिवारी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से शिकायत की थी। मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि लैंड फॉर जॉब में लालू यादव यदि दोषी नहीं होते तो सुप्रीम कोर्ट में जाकर रिलीफ लेते।
आरजेडी ने लगाया साजिश करने का आरोप
राजद के विधायक मुकेश यादव ने कहा है कि जब-जब चुनाव नजदीक आता है तो भाजपा सरकार लालू प्रसाद यादव के खिलाफ इसी तरह साजिश करती है उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। यह सब चुनाव प्रभावित करने की साजिश है। वहीं मुकेश रौशन ने कहा जब सत्ता परिवर्तन होना होता है ईडी, सीबीआइ को सक्रिय किया जाता है और नतीजा सरकार विरोधी हो जाता है। इस बार बिहार में भी सत्ता परिवर्तन होकर रहेगा।
क्या है नौकरी के बदले जमीन घोटाले का मामला
बता दें कि जमीन बदले नौकरी के मामले में सीबीआई ने लालू समेत 78 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट के मुताबिक 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री के रूप में काम करते हुए लालू प्रसाद यादव ने रेलवे की ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों से जमीन और संपत्ति लिखवाई थी।
