कैनविज टाइम्स,डिजिटल डेस्क। महाकुंभ 2025 के दौरान महाशिवरात्रि पर विशेष व्यवस्था की गई है, जिसमें ‘जो जिधर से आएगा, वो उधर ही नहाएगा’ की नीति लागू की गई है। इस नीति के तहत, श्रद्धालुओं को उनके आगमन के मार्ग के अनुसार निर्धारित स्नान घाटों पर ही स्नान करने की व्यवस्था की गई है, ताकि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस विशेष दिन पर, आईजी स्तर के अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जो सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि सभी श्रद्धालु सुरक्षित रूप से स्नान कर सकें। यह कदम प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देने के लिए उठाया गया है।
महाशिवरात्रि का स्नान महाकुंभ का अंतिम अमृत स्नान होता है, जो 26 फरवरी 2025 को आयोजित होगा। इस दिन त्रिवेणी संगम में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह महाकुंभ के समापन का दिन होता है।
इस विशेष दिन पर प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं से श्रद्धालुओं को अधिक सुविधा और सुरक्षा मिलेगी, जिससे वे अपने धार्मिक कर्तव्यों को निर्विघ्न रूप से निभा सकेंगे।
