कैनविज टाइम्स,डिजिटल डेस्क। राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के जनक कहे जाने वाले डॉ. शांति स्वरूप भटनागर की जयंती के अवसर पर समाधान आईएपीटी अंवेषिका के तत्वावधान में अवध पब्लिक स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में "जाने शांति स्वरूप भटनागर को", "आओ सीखें विज्ञान", "हैंड्स-ऑन" और "प्रश्नोत्तरी" जैसे रोचक सत्र आयोजित किए गए। इस दौरान डॉ. भटनागर को नमन, स्मरण और वंदन अर्पित किया गया। विद्यालय की प्रधानाचार्या आरती मिश्रा ने बताया कि डॉ. भटनागर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के प्रथम अध्यक्ष थे। डीएससी की पढ़ाई के बाद वे भारत लौटे और बीएचयू से जुड़े।वे वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के संस्थापक निदेशक बने और भारत में 12 राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं की स्थापना में अहम भूमिका निभाई।
साथ ही, उन्होंने शिक्षा मंत्रालय में सचिव और सरकार के शैक्षिक सलाहकार के रूप में कार्य किया। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।कार्यक्रम समन्वयक लक्ष्मी कांत शर्मा ने बताया कि डॉ. भटनागर ने बचपन में ही स्कूल में विद्युत घंटी और टेलीफोन के बारे में पढ़कर उसे घर पर बनाया और पेट्रोल शोधन किया। उन्होंने छात्रों को सोशल मीडिया के माध्यम से डॉ. भटनागर के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देने का संदेश दिया।कार्यक्रम में आवृत्ति, आवर्तकाल, आयाम, दोलनी गति और श्रव्यता की सीमा को सरल प्रयोगों के माध्यम से समझाया गया।
विद्यार्थियों ने स्वयं प्रयोग किए और विज्ञान की गहरी समझ विकसित की।प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में सांची अग्रवाल और अभिमान पाल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया,जिन्हें प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। विद्यार्थियों ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक, वैज्ञानिक परंपरा से अवगत कराने वाला और शोध के प्रति प्रेरित करने वाला बताया।कार्यक्रम के सफल आयोजन में मंजू गुप्ता,दीक्षा सैनी और प्रखर त्रिवेदी का महत्वपूर्ण योगदान रहा हैं।
