कैनविज टाइम्स,डिजिटल डेस्क। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है। यह धार्मिक आयोजन न केवल भारत, बल्कि पाकिस्तान, अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देशों के मीडिया में भी प्रमुखता से कवर हो रहा है। हर साल लाखों श्रद्धालु इस महान धार्मिक मेला में शामिल होते हैं, लेकिन इस बार कुंभ मेले की विशेषता और महत्व को लेकर विदेशी मीडिया की कवरेज बहुत ही खास रही है।
पाकिस्तान का दृष्टिकोण
पाकिस्तानी मीडिया ने कुंभ के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को बहुत विस्तार से कवर किया है। पाकिस्तानी समाचार पत्रों और चैनलों ने कुंभ को एक धार्मिक सामूहिकता के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसमें एकजुटता, शांति और समाजिक समरसता का संदेश दिया जा रहा है। पाकिस्तानी मीडिया में विशेष रूप से कुंभ मेले में भारतीय संस्कृति, तात्त्विकता और हिंदू धर्म के महत्व को प्रमुखता से दिखाया गया है। कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इस आयोजन में विश्व भर से श्रद्धालु आते हैं, जो भारतीय सभ्यता और संस्कृति के बारे में सीखने का एक अद्वितीय अवसर है।
अमेरिका का दृष्टिकोण
अमेरिकी मीडिया ने कुंभ मेले को एक वैश्विक आयोजन के रूप में देखा है। वहां के प्रमुख समाचार पत्रों और चैनलों ने कुंभ मेले की विशालता, उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उसकी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। कई अमेरिकी रिपोर्ट्स ने कुंभ को 'विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला' करार दिया है। इसके साथ ही, अमेरिकी मीडिया ने ध्यान आकर्षित किया है कि कुंभ में लाखों श्रद्धालुओं का एकत्रित होना और पूरे मेले का आयोजन उच्चतम स्तर पर किया जाना भारतीय लोकतंत्र और उसकी विविधता का प्रतीक है।
अन्य देशों की प्रतिक्रियाएं
कुंभ मेले पर दुनिया के अन्य देशों जैसे जापान, चीन, रूस और मध्य-पूर्व देशों में भी मीडिया ने अपनी रिपोर्ट्स दी हैं। खासतौर पर रूस और चीन में कुंभ को एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जबकि जापान में इस आयोजन को ध्यान और साधना के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है, जहां हजारों लोग ध्यान करते हुए गंगा स्नान करते हैं। कुंभ मेला एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन से कहीं बढ़कर है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्थाओं को साकार करता है, बल्कि एक समृद्ध भारतीय संस्कृति और सभ्यता का भी प्रतिनिधित्व करता है। कुंभ मेले में न केवल हिंदू धर्म के लोग बल्कि अन्य धर्मों के लोग भी आते हैं, जो इस अवसर पर भारत की धार्मिक विविधता और समग्रता को समझने का प्रयास करते हैं।
