कैनविज टाइम्स,डिजिटल डेस्क। महाकुंभ मेले में एक बाबा की कहानी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है, जिनका नाम रबड़ी वाले बाबा के तौर पर प्रसिद्ध है। इस बाबा का अद्भुत काम है – वह हर दिन 130 लीटर दूध का इस्तेमाल करते हैं और इस दूध से रबड़ी बनाकर उसे श्रद्धालुओं के बीच बांटते हैं। उनका यह अनोखा कार्य सिर्फ खाने-पीने की सुविधा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी जीवनदर्शन और सिद्धांत छुपा हुआ है।
रबड़ी वाले बाबा का मानना है कि "जब तक आप दूसरों को कुछ नहीं देते, तब तक आपका जीवन अधूरा है।" उनका उद्देश्य न केवल पुण्य कमाना है, बल्कि लोगों को साथ मिलकर एकजुट करने का है। महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन में, जहां हर वर्ग के लोग आते हैं, वह इस सिद्धांत को जीवन में उतारते हुए रबड़ी वितरित करते हैं। बाबा का कहना है कि रबड़ी के माध्यम से वह लोगों में आपसी भाईचारे और दया की भावना जागृत करते हैं।
हर दिन 130 लीटर दूध का इस्तेमाल करते हुए, बाबा की सेवा में उनकी टीम भी साथ देती है, जो दूध को अच्छी गुणवत्ता वाली रबड़ी में बदलकर श्रद्धालुओं को वितरित करती है। इस काम में उन्हें न केवल संतुष्टि मिलती है, बल्कि वह यह भी मानते हैं कि इस कार्य से वह अपने जीवन का उद्देश्य पूरा कर रहे हैं। रबड़ी बनाने का उनका तरीका भी बहुत विशेष है। वह हर दिन ताजे दूध का चयन करते हैं और इसे धीमी आंच पर पकाकर रबड़ी तैयार करते हैं। इसके बाद, इस रबड़ी को श्रद्धालुओं को बड़े प्रेम और श्रद्धा के साथ बांटते हैं। उनका यह कार्य महाकुंभ के असंख्य भक्तों के लिए एक विशेष आशीर्वाद की तरह होता है।
