कैनविज टाइम्स,डिजिटल डेस्क।प्रयागराज (2025) – महाकुंभ का आयोजन हर बार की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं और साधुओं का आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, लेकिन इस बार महाकुंभ में अजब-गजब बाबाओं की उपस्थिति ने एक अलग ही रंग जमा दिया है। जहां कुछ बाबाओं की वाणी में ज्ञान और साधना की गूंज है, वहीं कुछ बाबाओं का अंदाज पूरी तरह से मनोरंजन और संदेश देने वाला है।
1. हंसी ठहाकों का माहौल:
कुंभ मेले में कुछ बाबाओं का ठहाकों से भरा हुआ अंदाज भी देखने को मिल रहा है। ये बाबा न केवल भक्तों को धार्मिक उपदेश देते हैं, बल्कि उनकी मर्जी के अनुसार नृत्य, मस्ती और ठहाके भी लगवाते हैं। उनके इन कारनामों ने श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इन बाबाओं की उपस्थिति से महाकुंभ में उत्सव का माहौल भी बना हुआ है।
2. नशा मुक्ति का संदेश:
वहीं, कुछ अन्य बाबा इस बार कुंभ में नशे से मुक्ति का संदेश दे रहे हैं। इन बाबाओं का कहना है कि नशा शारीरिक और मानसिक दोनों ही रूप से हानिकारक है और इसे छोड़ने से जीवन में शांति और सुख मिल सकता है। इन बाबाओं के कैंप में नशा मुक्ति के लिए विशेष कार्यशालाएं और उपदेश दिए जा रहे हैं, और ये कार्यशालाएं श्रद्धालुओं के बीच बहुत ही लोकप्रिय हो रही हैं।
3. साधना और ध्यान के माहौल में बदलाव:
जहां एक ओर कुछ बाबाओं का उद्देश्य जीवन को आनंदित और नशामुक्त बनाना है, वहीं दूसरी ओर कुछ बाबाओं के आसन पर गहरी साधना और ध्यान के वातावरण में लोग जुड़ रहे हैं। इन बाबाओं के द्वारा प्रदान किए जाने वाले ध्यान और साधना के अवसरों को लोग आस्था और विश्वास के साथ ग्रहण कर रहे हैं।
4. सामाजिक संदेश और शिक्षा:
महाकुंभ में कुछ बाबाओं का उद्देश्य सिर्फ धार्मिक उपदेश देना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना भी है। इन बाबाओं का मानना है कि कुंभ का पर्व सिर्फ आध्यात्मिक उन्नति के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक कल्याण के लिए भी होना चाहिए। इसके तहत वे महिलाओं के अधिकार, बच्चों की शिक्षा, और समाज में भाईचारे का संदेश दे रहे हैं।
