कैनविज टाइम्स,डिजिटल डेस्क। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के लमुईया गांव में 230 बीघा भूमि को शत्रु संपत्ति घोषित किया जाएगा। यह भूमि चार व्यक्तियों के नाम से दर्ज है, जो भारत विभाजन के समय पाकिस्तान चले गए थे। इन व्यक्तियों के पाकिस्तान में बसने के बाद उनकी संपत्ति भारतीय कानून के तहत शत्रु संपत्ति के रूप में मानी जाती है। अब जिला प्रशासन ने इस भूमि को शत्रु संपत्ति घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, यह भूमि पहले चार व्यक्तियों के नाम पर रजिस्टर्ड थी, जिनका संबंध पाकिस्तान से था और वे विभाजन के समय भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे। इन लोगों के खिलाफ शत्रु संपत्ति कानून के तहत कार्रवाई की जाती है, क्योंकि वे पाकिस्तान में बसने के बाद अपनी संपत्तियों को छोड़ गए थे।
जिला प्रशासन ने अब इस भूमि को शत्रु संपत्ति के रूप में मान्यता देने के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रशासन ने पहले इस भूमि की पहचान की और फिर संबंधित प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए अब सार्वजनिक नोटिस जारी करने की तैयारी कर ली है। इस नोटिस के माध्यम से आम जनता से इस भूमि के बारे में आपत्तियां मांगी जाएंगी। यदि कोई आपत्ति नहीं आती, तो फिर गृह मंत्रालय को पत्र भेजकर इस भूमि को औपचारिक रूप से शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया जाएगा।
शत्रु संपत्तियों की पहचान और उसके अधिग्रहण की प्रक्रिया भारतीय सरकार की नीति के तहत होती है। यह संपत्तियां उन व्यक्तियों के नाम से होती हैं जो विभाजन के समय पाकिस्तान चले गए थे और जिनका अब भारत में कोई अधिकार नहीं है। इन संपत्तियों को सरकार द्वारा सार्वजनिक उपयोग के लिए आवंटित किया जाता है।
