सीडीओ साहब ? एक नजर कोरांव ब्लाक के मनरेगा सेल की ओर
सरकार की स्वछ छबि कों धूमिल रहा रहा दिमक की तरह ब्लाक कोरांव मे ब्याप्त भ्रष्टाचार
राहुल सिंह
कोरांव (प्रयागराज )
कई वर्षो सें एक ही जगह जमे एपीओ मनरेगा का तबादला न होने सें पुरे क्षेत्र मे चर्चा का विषय बना रहता है जबकि
समय -समय पर हर विभाग मे ट्रांसफर होता है लेकीन ऐसा लगता है मनरेगा मे नियुक्त कर्मचारी या अधिकारी का तबादला करने का कोई नियम क़ानून नही बना है जिसका जीता जागता उदाहरण ब्लाक कोरांव मे एपीओ मनरेगा सेल मे जो कई वर्षो सें एक ही जगह पोस्टिंग है इनका तबादला लगता है विभाग के आलाधिकारी भूल गए है या उची पकड़ पहुँच सुविधा शुल्क के बलबूते ट्रांसफर रोकवा लेते है चुकी इनका नेटवर्क पुरे ब्लाक मे मकड़जाल की तरह फैला हुआ है अच्छा खाशा जान पहचान भी हो गया है जिस कारण ब्लाक कोरांव सें अब अन्य ब्लाक मन नही भायेगा बातचीत के दौरान कई प्रधानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया की एपीओ मनरेगा द्वारा अपने पद का दुरुयोग करते है
बगैर कार्य हुये ही मास्टर रोल जारी किया जाता है ऊपर सें शासन के दबाव मे अनुचित तरिके सें नियम क़ानून उच्चाधिकारियो के आदेश का अवहेलना करते हुये मनमानी तरिके मास्टर रोल जारी करके बगैर काम कराये ही फीडिंग कर दिया जाता है
आईडी बनाने के नाम पर प्रधानों सें 1000 हजार प्रति आईडी बनाने के लिए अवैध तरिके सें वसूली किया जाता है जो पैसा नही देता है उसका न तो आईडी बनाया जाता है न ही मनरेगा कार्य की स्वीकृति मिलता है प्रधानों ने यह भी बताया की कही न कही मजबूरी है की चाहकर भी उच्चाधिकारियो सें शिकायत नही कर पाता हूँ शिकायत यदि कोई कर भी देता है तो उसी कों ब्लाक के अधिकारी टारगेट पर लेकर दूसरे सें झूठी शिकायत कराकर कार्रवाही करने की बात कहते है यही मुख्य वजह है की ग्राम पंचायत के विकास की पहिया नही चल पा रही है क्षेत्र के सम्मानित लोगो व ग्राम प्रधानों ने एपीओ मनरेगा का तबादला कराने की माँग की है जिससे कमीशन खोरी पर लगाम लगे साथ ही समग्र गांव का विकास भी हो सके इस मामले मे एपीओ मनरेगा सें वार्ता करने का प्रयास किया गया लेकीन बात नही हो पाया