कैनविज टाइम्स,डिजिटल डेस्क । प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में आयोजित हो रहे महाकुंभ 2025 में आज एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिलेगा, जब 73 देशों के राजनयिकों और 116 अतिथियों की टोली संगम में डुबकी लगाएगी। ये अतिथि विशेष रूप से महाकुंभ के धार्मिक महत्व को महसूस करने और भारतीय संस्कृति से जुड़ने के लिए आए हैं।
ध्वजारोहण और डुबकी का विशेष महत्व:
महाकुंभ के इस विशेष अवसर पर अतिथियों को अरैल घाट पर अपने देशों का ध्वज फहराने का भी मौका मिलेगा। इसके बाद, ये अतिथि संगम में डुबकी लगाएंगे, जो कि भारतीय संस्कृति में शुद्धि और धार्मिकता का प्रतीक मानी जाती है। इस मौके पर भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का आदान-प्रदान देखने को मिलेगा।
महाकुंभ के उद्देश्य और महत्व:
महाकुंभ का आयोजन हर 12 साल में एक बार होता है और यह भारत के सबसे बड़े धार्मिक मेलों में से एक है। इस मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा और पर्यटक भाग लेते हैं। महाकुंभ न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विविधता और आस्था का भी प्रतीक है।
