- 450 से अधिक श्रोताओं ने लिया काव्य रचनाओं का आनंद, कवियों ने हास्य-व्यंग्य के साथ रिश्तों और बदलती जिंदगी पर भी साधा निशाना
लखनऊ, कैनविज टाइम्स संवाददाता। हिंदी पखवाड़ा-2026 के समापन अवसर पर राजभाषा विभाग, सीएसआईआर-केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान(सीएसआईआर-सीडीआरआई), लखनऊ और उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के सहयोग से मंगलवार को सीएसआईआर-सीडीआरआई के मुख्य प्रेक्षागृह में हास्य कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। करीब 450 श्रोताओं से खचाखच भरे सभागार में कवियों की प्रस्तुतियों पर जमकर तालियां बजीं और ठहाके गूंजते रहे। कार्यक्रम का संचालन कवि पंकज प्रसून ने किया। कवि अशोक झंझटी ने रिश्तों में बढ़ती दूरी और बदलते मानवीय व्यवहार को अपनी रचना के माध्यम से उकेरा। कमल आग्नेय ने विज्ञान, आत्मविश्वास और भारत की बढ़ती क्षमता को कविता का विषय बनाते हुए श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं। वहीं पंकज प्रसून ने सोशल मीडिया और डिजिटल दौर की विसंगतियों पर चुटीली रचनाएं सुनाकर खूब हंसाया। शिखा श्रीवास्तव ने प्रेम और रिश्तों की संवेदनशीलता को अपनी कविता में पिरोया। मुकुल महान ने चाय, अखबार, प्रेम और जिंदगी के सफर को शब्दों में बांधा। वहीं हेमंत पांडेय ने अपने हास्यपूर्ण अंदाज और चुटीली पंक्तियों से श्रोताओं को देर तक गुदगुदाया। कार्यक्रम के दौरान चीफ वैज्ञानिक डॉ. राजकमल श्रीवास्तव ने सभी कवियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के निदेशक सर्वेश कुमार सिंह की भी सहभागिता रही। कार्यक्रम में हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रचार-प्रसार के साथ वैज्ञानिक संस्थानों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर जोर दिया गया। सीएसआईआर-सीडीआरआई के वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य अतिथियों समेत करीब 450 लोग कार्यक्रम में मौजूद रहे। हास्य, व्यंग्य और काव्य की विविध प्रस्तुतियों ने हिंदी पखवाड़े के समापन समारोह को यादगार बना दिया।




