लेसा पेंशन खंड ट्रांसफर मामला: विद्युत पेंशनर्स परिषद ने प्रबंध निदेशक को लिखा पत्र, पेंशनरों की समस्या स्थायी समाधान की मांग
लखनऊ।
लखनऊ इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई एडमिनिस्ट्रेशन (लेसा) से जुड़े पेंशनरों की समस्याओं को लेकर विद्युत पेंशनर्स परिषद ने प्रबंध निदेशक को एक विस्तृत पत्र लिखा है। परिषद के प्रमुख महासचिव कप्तान सिंह ने मीडिया को इस संबंध में जानकारी दी।
क्या है पूरा मामला?
परिषद के अनुसार, 15 नवंबर 2025 से पहले लेसा के दो पेंशन खंडों — नगरीय विद्युत निर्माण खंड तृतीय और नगरीय विद्युत वितरण खंड रहीमनगर — में पंजीकृत पेंशनरों का अभिलेख अब तक नई वर्टिकल पेंशन व्यवस्था के तहत बनाए गए संबंधित पेंशन खंडों को हस्तांतरित नहीं किया गया है।
कप्तान सिंह ने बताया कि करीब एक साल पहले लेसा के चारों क्षेत्रों में पेंशन कार्यों के लिए अधिशासी अभियंता (एडमिन/पीआर/रेड/हेल्प डेस्क) की वर्टिकल व्यवस्था लागू की गई थी। लेकिन इतने समय बाद भी पुराने दोनों पेंशन खंडों के पेंशनरों के महत्वपूर्ण दस्तावेज — जैसे पीपीओ (PPO), आवासीय पता और मोबाइल नंबर — नए चार अधिशासी अभियंताओं (एडमिन) को हस्तांतरित नहीं किए गए हैं। इसकी वजह से पेंशनरों को कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
परिषद ने बताया व्यावहारिक समाधान
परिषद का कहना है कि 15 नवंबर 2025 से पहले इन दोनों पेंशन खंडों में कार्यरत रहे कर्मचारियों की मदद से पेंशनरों की सूची और जरूरी दस्तावेज तैयार कराकर चारों क्षेत्रों के अधिशासी अभियंताओं को भेजना एक जटिल और कठिन प्रक्रिया साबित हो रही है।
परिषद ने सुझाव दिया है कि वर्तमान की चार पेंशन खंड व्यवस्था की जगह पहले की तरह दो पेंशन खंड बनाकर अधिशासी अभियंता (वर्टिकल एडमिन) की एक इकाई गठित की जाए, ताकि प्रक्रिया सरल और सुव्यवस्थित हो सके।
14 जनवरी 2000 से पहले के पेंशनरों को लेकर भी उठाई आपत्ति
पत्र में परिषद ने एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा भी उठाया है। 14 जनवरी 2000 तक सेवानिवृत्त हुए कर्मचारी पूर्ववर्ती उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद के कार्मिक माने जाते हैं और उन्हें कोषागार से पेंशन मिलती है। इनसे जुड़े केवल चिकित्सा भत्ता और चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मामले ही पेंशन खंड से संबंधित होते हैं।
परिषद ने आरोप लगाया कि जो कर्मचारी 14 जनवरी 2000 के बाद अन्य निगमों में प्रतिनियुक्ति पर कार्य करते हुए सेवानिवृत्त हुए, उनके चिकित्सा भत्ता और चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मामलों को यह कहकर निपटाने से इनकार किया जा रहा है कि केवल उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के मामले ही देखे जाएंगे। परिषद ने इसे नियम विरुद्ध बताते हुए कहा कि विद्युत सुधार अंतरण स्कीम 2000 में स्पष्ट प्रावधान है कि पूर्ववर्ती उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद के पेंशनरों के टर्मिनल बेनिफिट्स की पूरी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड और उत्तर प्रदेश सरकार की है।
परिषद की मांग
विद्युत पेंशनर्स परिषद ने प्रबंध निदेशक से अनुरोध किया है कि:
- विद्युत नगरी निर्माण खंड (द्वितीय) रेजिडेंसी (पेंशन) खंड को अधिशासी अभियंता (वर्टिकल) एडमिन/पीआर, मध्य क्षेत्र को सौंपा जाए।
- विद्युत नगरीय वितरण खंड रहीम नगर को अधिशासी अभियंता पेंशन (वर्टिकल) पीआर/एडमिन एवं रेड, लेसा जानकीपुरम क्षेत्र को सौंपा जाए।
परिषद के अनुसार, इस व्यवस्था से पेंशनरों की समस्याओं का स्थायी समाधान संभव हो सकेगा।
