लखनऊ मंडल में स्वास्थ्य विभाग का 15 दिवसीय विशेष अभियान: स्टेशनों पर औचक निरीक्षण, शाहगंज में क्लोरीनेशन शून्य मिलने पर सुधार के निर्देश
लखनऊ।
रेलवे बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन में उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल में 20 अगस्त 2026 से 15 दिवसीय विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न रेलवे परिसरों एवं स्टेशनों पर औचक निरीक्षण के साथ-साथ पेयजल की गुणवत्ता की गहन जांच की जा रही है। अभियान का मुख्य उद्देश्य रेलवे परिसरों में यात्रियों और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना और निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली किसी भी कमी पर तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई करना है।
आलमबाग डीजल शेड हेल्थ यूनिट का निरीक्षण
इसी क्रम में शनिवार को अपर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (स्वास्थ्य) डॉ. पंकज गोयल ने आलमबाग स्थित डीजल शेड हेल्थ यूनिट का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया गया। जांच में पेयजल के क्लोरीनेशन की स्थिति शून्य (Nil) पाई गई, जिस पर संबंधित विभाग को आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए।
प्रतापगढ़ स्टेशन: पेयजल गुणवत्ता संतोषजनक
अभियान के अंतर्गत प्रतापगढ़ स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 स्थित वॉटर बूथ नंबर 5 से अवशिष्ट क्लोरीन (Residual Chlorine) की जांच की गई। यहां क्लोरीन की मात्रा संतोषजनक पाई गई, जो दर्शाता है कि इस स्टेशन पर पेयजल व्यवस्था मानकों के अनुरूप है।
शाहगंज स्टेशन: क्लोरीनेशन शून्य, असंतोषजनक स्थिति
वहीं दूसरी ओर, शाहगंज स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 स्थित वॉटर बूथ नंबर 1 से ली गई जांच में अवशिष्ट क्लोरीन की मात्रा शून्य (Nil) पाई गई, जिसे असंतोषजनक करार दिया गया है। इस गंभीर कमी को लेकर संबंधित विभाग को तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के लिए सूचित किया जाएगा।
मंडल रेल प्रबंधक के मार्गदर्शन में चल रहा अभियान
यह विशेष अभियान मंडल रेल प्रबंधक, उत्तर रेलवे, सुनील कुमार वर्मा के मार्गदर्शन और मंडल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चारु चंद सक्सेना के निर्देशन में चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य रेलवे कॉलोनियों, परिसरों और स्टेशनों पर यात्रियों को शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा पेयजल में क्लोरीनेशन से जुड़ी कमियों की पहचान कर उन्हें तुरंत दूर करने तथा समूची पेयजल व्यवस्था में प्रभावी सुधार लाने के लिए नियमित निगरानी एवं जांच की जा रही है।
