ब्लेंडेड सीमेंट से निर्माण की गुणवत्ता और टिकाऊपन होगा बेहतर, इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स लखनऊ में तकनीकी व्याख्यान आयोजित
लखनऊ।
द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), उत्तर प्रदेश राज्य केंद्र, लखनऊ की ओर से शनिवार को इंजीनियर्स भवन, रिवर बैंक कॉलोनी में 'केमिस्ट्री ऑफ सीमेंट एंड यूज ऑफ ब्लेंडेड सीमेंट' विषय पर तकनीकी व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अभियंताओं और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों को सीमेंट की रासायनिक संरचना, गुणों तथा निर्माण कार्यों में ब्लेंडेड सीमेंट के प्रभावी उपयोग की जानकारी देना था।
अध्यक्षीय संबोधन: आधुनिक तकनीकों को अपनाने का आह्वान
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के चेयरमैन इं. वी.पी. सिंह ने की। उन्होंने कहा कि वर्तमान निर्माण क्षेत्र में सीमेंट की रासायनिक संरचना और उसके गुणों की सही समझ बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, ब्लेंडेड सीमेंट के उचित उपयोग से निर्माण की गुणवत्ता, टिकाऊपन और पर्यावरणीय स्थिरता को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने अभियंताओं से आधुनिक तकनीकों और नई निर्माण सामग्री के उपयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता ने बताए ब्लेंडेड सीमेंट के फायदे
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, पूर्व सहायक कार्यकारी निदेशक, डालमिया सीमेंट-चेन्नई, इं. मुर्गेश भुस्ताली ने सीमेंट की रासायनिक प्रकृति, विभिन्न घटकों और निर्माण पर उनके प्रभाव की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने ब्लेंडेड सीमेंट की अवधारणा, प्रकार, उपयोगिता और इसके लाभों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि निर्माण की मजबूती, गुणवत्ता और दीर्घकालीन टिकाऊपन के लिए उपयुक्त सीमेंट का चयन आवश्यक है।
उन्होंने विभिन्न व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से सीमेंट के चयन, उपयोग और गुणवत्ता से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी। साथ ही टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण निर्माण में ब्लेंडेड सीमेंट की भूमिका पर विशेष जोर दिया।
तकनीकी ज्ञान अद्यतन करने का महत्वपूर्ण मंच
कार्यक्रम के संयोजक इं. जे.बी. सिंह ने कहा कि ऐसे तकनीकी व्याख्यान अभियंताओं के ज्ञान को अद्यतन करने और उन्हें आधुनिक निर्माण तकनीकों एवं सामग्रियों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम का संचालन भी इं. जे.बी. सिंह ने किया।
अंत में संस्था के मानद सचिव इं. एन.के. निषाद ने मुख्य वक्ता, अध्यक्ष, अभियंताओं, शिक्षाविदों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
