बाल संरक्षण में परिवार की भूमिका अहम : शैजी अहमद
लखनऊ। डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग की ओर से आयोजित 7वें राष्ट्रीय समाज कार्य सप्ताह-2026 का समापन एक ऑनलाइन विशेष व्याख्यान के साथ हुआ। 'ए चाइल्ड सेंटर्ड अप्रोच टू प्रोटेक्शन, पैरेंटिंग, रेजिलिएंस एंड लर्निंग' विषय पर आयोजित इस व्याख्यान में राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग की सह-आचार्या डॉ. शैजी अहमद ने बाल संरक्षण और पालन-पोषण पर अपने विचार रखे।
परिवार का वातावरण बच्चों के विकास में निर्णायक: डॉ. अहमद
डॉ. अहमद ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और पालन-पोषण में परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उनके अनुसार परिवार का वातावरण बच्चों के शारीरिक, सामाजिक और मानसिक विकास को सीधे प्रभावित करता है। माता-पिता का सहयोगात्मक और सकारात्मक व्यवहार बच्चों के सर्वांगीण विकास में मदद करता है।
पॉक्सो एक्ट और किशोर न्याय अधिनियम पर दी गई जानकारी
व्याख्यान में डॉ. अहमद ने पॉक्सो एक्ट और किशोर न्याय अधिनियम-2015 के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सामान्य रूप से 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को बालक माना जाता है।
किशोर न्याय अधिनियम में बच्चों से संबंधित दो प्रमुख श्रेणियां बताई गईं:
- कानून से संघर्षरत बालक (CICL)
- देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बालक (CNCP)
इसके अलावा उन्होंने परिवार की अवधारणा, उसके प्रकार और बच्चों के पालन-पोषण में उसकी भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम का संचालन और सहभागिता
- डॉ. अर्चना सिंह (विभागाध्यक्ष एवं सह-आचार्या) ने स्वागत भाषण दिया
- डॉ. रुपेश कुमार सिंह (सह-आचार्य) ने कार्यक्रम की रूपरेखा और वक्ता का परिचय प्रस्तुत किया
- व्याख्यान के बाद हुए प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने कई सवाल पूछे, जिनके जवाब मुख्य वक्ता ने दिए
- कार्यक्रम का संचालन तृतीय क्षमाही की छात्रा एनुल हुदा अंसारी ने किया
- श्रेया चतुर्वेदी ने धन्यवाद ज्ञापित किया
कार्यक्रम में सहायक आचार्य डॉ. श्याम सिंह, डॉ. अवधेश कुमार समेत शोधार्थी अमित कुमार, निलया श्रीवास्तव, विश्राम सागर वर्मा, पंकज कुमार, राहुल कुमार सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के 70 से अधिक शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी ऑनलाइन जुड़े।
