भाषा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा को 'अवध गौरव सम्मान' से किया गया विभूषित
अवधी भाषा, साहित्य और संस्कृति की उन्नति में योगदान के लिए मिला सम्मान
लखनऊ। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति प्रो. अजय तनेजा को अवधी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति की उन्नति और संवर्धन के लिए 'अवध गौरव सम्मान' से विभूषित किया गया। गोमतीनगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान के प्रेक्षागृह में आयोजित गरिमामय समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।
गणमान्य अतिथियों के हाथों मिला सम्मान
अवधी विकास संस्थान द्वारा आयोजित इस समारोह में निम्न गणमान्य अतिथियों के कर-कमलों द्वारा प्रो. अजय तनेजा को सम्मानित किया गया:
- न्यायमूर्ति राम मनोहर मिश्रा – इलाहाबाद उच्च न्यायालय
- डॉ. हरिओम – वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारी
- उमेश धर द्विवेदी – आई.आर.एस. अधिकारी
इस अवसर पर अवधी विकास संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद मिश्रा, राष्ट्रीय स्तर के कलाकार, संभ्रांत नागरिक तथा विश्वविद्यालय के कुलानुशासक डॉ. नीरज शुक्ल, शिक्षक डॉ. अंशुल पाण्डेय एवं डॉ. योगेंद्र सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
"अवध केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, सांस्कृतिक विरासत है" : प्रो. तनेजा
सम्मान प्राप्त होने पर कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने कहा कि अवध केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति, तहजीब और मानवीय मूल्यों के लिए विशिष्ट पहचान रखने वाली सांस्कृतिक विरासत है। उन्होंने कहा कि अवधी भाषा और उसकी समृद्ध साहित्यिक परंपरा को संरक्षित करना तथा नई पीढ़ी को इससे जोड़ना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
विश्वविद्यालय स्तर पर भी हो रहे संरक्षण के प्रयास
प्रो. तनेजा ने बताया कि अवधी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा:
"भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि किसी समाज की स्मृति, संवेदना और सांस्कृतिक पहचान की वाहक होती है। अवधी जैसी समृद्ध लोकभाषा को नई पीढ़ी से जोड़ना समय की आवश्यकता है।"
सम्मान को बताया जिम्मेदारी और प्रेरणा
प्रो. तनेजा ने 'अवध गौरव सम्मान' को अपने लिए गौरव के साथ-साथ एक बड़ी जिम्मेदारी बताया। उनके अनुसार यह सम्मान उन्हें अवधी भाषा, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में और अधिक समर्पण एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने की प्रेरणा देगा। उन्होंने कहा कि अवध की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए उसके मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।
