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बीबीएयू लखनऊ में 'युवा संवाद': युवाओं से नौकरी मांगने वाला नहीं, देने वाला बनने का आह्वान

बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ में सप्त दिवसीय हिन्दी कार्यशाला के तहत 'युवा संवाद' हुआ। डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव ने युवाओं को नवाचार और उद्यमिता के लिए प्रेरित किया।
  • By Kanhwizz Times
  • Reported By: Shivam Srivastava
  • Updated: September 19, 2026

बीबीएयू में 'युवा संवाद' का आयोजन, युवाओं को नवाचार और उद्यमिता के लिए किया प्रेरित

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में शुक्रवार को हिंदी प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित 'सप्त दिवसीय हिन्दी कार्यशाला' के अंतर्गत 'युवा संवाद' का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बीबीएयू के सहायक निदेशक (राजभाषा) डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव उपस्थित रहे।

 मुख्य बिंदु

  • आयोजन: हिंदी प्रकोष्ठ की सप्त दिवसीय हिन्दी कार्यशाला के तहत 'युवा संवाद'
  • मुख्य वक्ता: डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव, सहायक निदेशक (राजभाषा), बीबीएयू
  • संदेश: युवा रोजगार तलाशने वाले नहीं, रोजगार सृजित करने वाले बनें
  • आह्वान: शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता में बढ़-चढ़कर भागीदारी
  • विशेष: विद्यार्थियों और शोधार्थियों के साथ संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र

"युवाओं में अपार क्षमता और प्रतिभा"

युवाओं को संबोधित करते हुए डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि युवाओं में अपार क्षमता और प्रतिभा है। वे अपनी क्षमताओं का सदुपयोग करके जीवन में बड़ा मुकाम हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि चाहे शैक्षणिक क्षेत्र हो या कोई अन्य, आज भारत का युवा वैश्विक स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है।

नवाचार और उद्यमिता से बढ़ रहे आगे

डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से युवा लगातार प्रगति की ओर बढ़ रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में युवाओं ने स्टार्टअप स्थापित कर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें केवल रोजगार की तलाश करने वाला नहीं, बल्कि रोजगार के अवसर सृजित करने वाला बनना चाहिए।

विकसित भारत के लक्ष्य में युवाओं की भूमिका

डॉ. श्रीवास्तव ने युवाओं से शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता और रचनात्मक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अपनी प्रतिभा और ऊर्जा का उपयोग सकारात्मक दिशा में करें। देश के भविष्य की जिम्मेदारी युवाओं के कंधों पर है, इसलिए समय और सामर्थ्य का सदुपयोग करते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करें।

संवादात्मक सत्र में पूछे गए सवाल

कार्यक्रम में युवाओं की सक्रिय सहभागिता के लिए संवादात्मक सत्र भी हुआ। इसमें विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने मुख्य वक्ता से विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे। डॉ. श्रीवास्तव ने उनके प्रश्नों के उत्तर देते हुए मार्गदर्शन किया। उन्होंने प्रतिभागियों को अपने लक्ष्यों के प्रति सजग रहने, निरंतर सीखने, आगे बढ़ने और राष्ट्रहित में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

इस अवसर पर डॉ. प्रीति राय, डॉ. संध्या दीक्षित, अन्य शिक्षक, गैर शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।

 

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