लंबित अनुमोदन और वित्तीय सहयोग की मांग को लेकर FPO-CBBO प्रतिनिधियों का कृषि भवन पर अनिश्चितकालीन धरना
लखनऊ: आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना के तहत गठित किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को लंबित अनुमोदन और वित्तीय सहयोग दिलाने की मांग को लेकर क्लस्टर बेस्ड बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन (CBBO) और FPO प्रतिनिधियों ने बुधवार को कृषि निदेशालय, लखनऊ में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि जब तक मांगों पर ठोस और समयबद्ध निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
उत्तर प्रदेश में कितने FPO बने, कितने किसान जुड़े?
प्रतिनिधियों के मुताबिक योजना के तहत उत्तर प्रदेश में कुल 625 FPO गठित करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसके सापेक्ष अब तक करीब 500 FPO का गठन हो चुका है। इन संगठनों से लगभग पांच लाख किसान सीधे जुड़े हुए हैं। FPO के जरिए किसानों को कृषि इनपुट, उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण, मूल्य संवर्धन और विपणन जैसी गतिविधियों में बेहतर बाजार सुविधा देकर उनकी आय बढ़ाने का लक्ष्य तय किया गया था।
योजना खत्म, लेकिन भुगतान अब भी अटके
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह योजना 31 मार्च 2025 को समाप्त हो चुकी है, बावजूद इसके गठित FPO को मिलने वाला वित्तीय सहयोग और अन्य जरूरी सहायता से जुड़े कई मामले अब भी लंबित पड़े हैं। उनका आरोप है कि अनुमोदन और फंडिंग में हो रही देरी की वजह से न सिर्फ FPO का संचालन प्रभावित हो रहा है, बल्कि इससे जुड़े किसानों तक अपेक्षित लाभ भी नहीं पहुंच पा रहा है।
कृषि निदेशक से हुई मुलाकात, नहीं निकला हल
धरने के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश के कृषि निदेशक से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। प्रतिनिधियों के अनुसार वार्ता में उन्हें बताया गया कि योजना की अवधि समाप्त हो चुकी है, इसलिए वर्तमान स्तर पर कुछ करना संभव नहीं है। इस जवाब के बाद प्रतिनिधियों में नाराजगी और बढ़ गई। उनका कहना है कि योजना भले खत्म हो गई हो, लेकिन पहले से गठित FPO और उनसे जुड़े किसानों के हित में शासन स्तर पर समाधान निकाला जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
- लंबित अनुमोदन शीघ्र पूरा किया जाए
- पात्र FPO को नियमानुसार वित्तीय सहयोग दिया जाए
- CBBO के लंबित दावों और भुगतान का निस्तारण हो
- पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय समीक्षा कराई जाए
- FPO को तकनीकी, प्रशिक्षण और विपणन सहयोग मिले
- लंबित मामलों के निपटारे के लिए समयबद्ध व्यवस्था बने
"यह लाखों किसानों के भविष्य का सवाल"
प्रतिनिधियों ने कहा कि यह मामला केवल CBBO या FPO के भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े लाखों किसानों के भविष्य का सवाल है। उनका कहना है कि अगर समय पर सहयोग नहीं मिला, तो FPO की कार्यक्षमता पर सीधा असर पड़ सकता है। प्रतिनिधियों ने शासन से मांग की कि मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री और संबंधित अधिकारी स्तर पर तुरंत हस्तक्षेप कर समाधान निकाला जाए।
धरना कब तक चलेगा?
प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक लंबित अनुमोदन, वित्तीय सहयोग और अन्य समस्याओं को लेकर ठोस और लिखित कार्यवाही नहीं होती, तब तक कृषि निदेशालय में उनका अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।
