कृषि मंत्री से मिले सीबीबीओ और एफपीओ प्रतिनिधि, तीन दिन में आख्या देने के निर्देश, धरना जारी
लखनऊ। सीबीबीओ और एफपीओ प्रतिनिधियों की कृषि मंत्री से मुलाकात के बाद कृषि निदेशालय ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य पोषित आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना के तहत वर्ष 2024-25 में चयनित 88 सीबीबीओ (क्लस्टर बेस्ड बिजनेस ऑर्गनाइजेशन) की पात्रता की जांच के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए संबंधित जिला अधिकारियों एवं मुख्य विकास अधिकारियों से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे रीता राय, अपूर्व सिंह, धर्मेंद्र, अशोक सिंह, ज्ञानेंद्र सिंह, अफजल अली, सलमान रिज़वी, अंजनी चौबे, आशीष कुमार, एस एम पाण्डेय, नरेश पाल, नृपेंद्र शर्मा और सलमान खान ने पत्र का हवाला देते हुए यह जानकारी साझा की।
तीन कार्य दिवस में आख्या देने का निर्देश
कृषि निदेशालय के दलहन अनुभाग की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि:
- चयनित सीबीबीओ की पात्रता का पारदर्शी तरीके से परीक्षण किया जाए
- भारत सरकार की कार्यदायी संस्था लघु कृषक कृषि व्यवसाय संघ (SFAC)/नाबार्ड के Expression of Interest के अनुसार जांच हो
- परीक्षण के बाद संस्तुति सहित आख्या शासन को उपलब्ध कराई जाए
निदेशालय ने कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिया है कि:
- मुख्य विकास अधिकारी/जिलाधिकारी की संस्तुति सहित आख्या संयुक्त कृषि निदेशक (दलहन) को ई-मेल के माध्यम से तीन कार्य दिवस में भेजी जाए
- समय से सूचना न देने पर संबंधित उप कृषि निदेशक की कार्य शिथिलता मानते हुए कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है
पत्र में संबंधित जिलाधिकारियों, मुख्य विकास अधिकारियों तथा राज्य पोषित कार्यदायी संस्थाओं को भी आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। मंडलीय संयुक्त कृषि निदेशकों से अपने स्तर पर समीक्षा कर संबंधित उप कृषि निदेशकों को समयान्तर्गत कार्रवाई कराने को भी कहा गया है।
किन जिलों को भेजा गया पत्र?
प्रदेश के सभी जिलों को यह पत्र भेजा गया है, सिवाय इन पांच जिलों के:
- संत कबीरनगर
- सिद्धार्थनगर
- हाथरस
- जालौन
- मैनपुरी
बुधवार से जारी है अनिश्चितकालीन धरना
गौरतलब है कि क्लस्टर बेस्ड बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन (CBBO) एवं FPO प्रतिनिधियों ने बुधवार को कृषि निदेशालय में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया था।
प्रतिनिधियों के अनुसार:
- योजना के तहत उत्तर प्रदेश में 625 FPO गठित किए जाने का लक्ष्य था
- इसके सापेक्ष अब तक करीब 500 FPO गठित हो चुके हैं
- इन संगठनों से लगभग 5 लाख किसान जुड़े हुए हैं
FPO के माध्यम से किसानों को कृषि इनपुट, उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण, मूल्य संवर्धन और विपणन जैसी गतिविधियों के ज़रिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और आय बढ़ाने का उद्देश्य रखा गया था।
"यह किसानों के भविष्य का सवाल" — सलमान रिजवी
प्रतिनिधि सलमान रिजवी का कहना है कि योजना की अवधि 31 मार्च 2025 को ही समाप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा:
यह मामला केवल CBBO या FPO के भुगतान का नहीं, बल्कि उनसे जुड़े लाखों किसानों के भविष्य का है।
