पुलिस बल की सहायता से दुकान का ताला तोड़कर कब्जा दिलाने के निर्देश
दुबग्गा, लखनऊ। शहर के एक चर्चित और लंबे समय से चले आ रहे संपत्ति विवाद में सिविल अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने विवादित दुकान का कब्जा डिक्रीधारक को दिलाने के लिए आवश्यकता पड़ने पर पुलिस बल की मौजूदगी में ताला तोड़ने की अनुमति दे दी है।
यह अहम आदेश अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन), कोर्ट संख्या 40, लखनऊ की अदालत द्वारा निष्पादन वाद में मो. हाशिम सिद्दीकी बनाम रवि प्रकाश सैनी के मामले में 10 अगस्त 2026 को जारी किया गया।
मामले की पृष्ठभूमि और अमीन की रिपोर्ट
अदालत के पूर्व आदेशों के अनुपालन में अमीन 6 अगस्त 2026 को सुबह लगभग 11:30 बजे विवादित स्थल पर कब्जा दिलाने पहुंचे थे। हालांकि, मौके पर दुकान बंद पाई गई और उस पर ताला लगा हुआ था। अमीन द्वारा संबंधित पक्ष को फोन पर सूचना दिए जाने के बाद भी कोई प्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचा।
क्षेत्र के अत्यधिक भीड़भाड़ वाले होने के कारण अमीन ने अदालत को रिपोर्ट सौंपी कि बिना पुलिस सहायता और ताला तोड़े अदालती आदेश का पालन कराया जाना संभव नहीं है। अमीन ने परिस्थितियों के मद्देनजर पुलिस बल उपलब्ध कराने और ताला खोलने की इजाजत मांगी थी।
प्रमुख कानूनी निर्देश
ताला तोड़ने की अनुमति देते हुए अदालत ने अमीन की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 21 नियम 35(3) के तहत आदेश दिया कि आवश्यकता पड़ने पर दुकान का ताला तोड़कर डिक्रीधारक को कब्जा सौंपा जाए।
पुलिस सहायता का आदेश: संबंधित थानाध्यक्ष/थाना प्रभारी को निर्देश दिया गया है कि वह मौके पर पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराएं ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए अदालती डिक्री का शांतिपूर्ण और प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जा सके।
अगली सुनवाई और अनुपालन: अदालत ने अमीन को निष्पादन की पूरी कार्रवाई समाप्त कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई और अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के लिए 1 सितंबर 2026 की तिथि तय की गई है।
अदालत के इस आदेश के बाद मो. हाशिम सिद्दीकी के पक्ष में पारित डिक्री के क्रियान्वयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है।
