बीबीएयू में राजभाषा हिंदी उत्सव-2026 के अंतर्गत 'राजभाषा कार्यान्वयन का व्यावहारिक पक्ष' पर व्याख्यान
लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में सोमवार को हिंदी प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित 'राजभाषा हिंदी उत्सव-2026' के अंतर्गत चल रही 'सप्त दिवसीय हिन्दी कार्यशाला' में 'राजभाषा कार्यान्वयन का व्यावहारिक पक्ष' विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।
इस व्याख्यान में मुख्य वक्ता के तौर पर भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के सहायक निदेशक (राजभाषा) अभिषेक प्रकाश उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव, डॉ. प्रीति राय एवं डॉ. संध्या दीक्षित प्रमुख रूप से मौजूद रहीं।
हिंदी का प्रयोग दैनिक व्यवहार में भी हो: अभिषेक प्रकाश
मुख्य वक्ता श्री प्रकाश ने 'राजभाषा कार्यान्वयन का व्यावहारिक पक्ष' विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राजभाषा हिंदी का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक हो सकता है, जब इसका प्रयोग कार्यालयी कार्यों के साथ-साथ दैनिक व्यवहार में भी सहज रूप से किया जाए। उन्होंने कहा कि हिंदी के प्रयोग को केवल राजभाषा संबंधी आयोजनों तक सीमित न रखते हुए इसे नियमित कार्यप्रणाली का अभिन्न अंग बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कार्यालयी पत्राचार, टिप्पण एवं प्रारूपण सहित विभिन्न प्रशासनिक कार्यों में सरल, सहज एवं प्रभावी हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर बल दिया।
हिंदी को सशक्त बनाना सामूहिक जिम्मेदारी
श्री प्रकाश ने कहा कि राजभाषा हिंदी को सशक्त बनाने की जिम्मेदारी केवल किसी एक व्यक्ति या विभाग की नहीं, बल्कि हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपने दैनिक कार्य-व्यवहार में हिंदी के प्रयोग को प्राथमिकता दें तथा अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
उन्होंने कहा कि हिंदी का निरंतर एवं व्यावहारिक प्रयोग ही राजभाषा के व्यापक प्रचार-प्रसार और प्रभावी कार्यान्वयन का आधार है। साथ ही 'राजभाषा हिंदी उत्सव-2026' जैसे आयोजन हिंदी के प्रति जागरूकता, आत्मीयता एवं प्रयोग की भावना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
