भाषा विश्वविद्यालय में नए लोकपाल की नियुक्ति, विद्यार्थियों की शिकायतों के निस्तारण को मिलेगी नई मजबूती
लखनऊ: ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ में विद्यार्थियों की शिकायतों के प्रभावी, निष्पक्ष और समयबद्ध निस्तारण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की बैठक में लिए गए निर्णय के तहत सेवानिवृत्त आचार्य एवं पूर्व अधिष्ठाता-छात्र कल्याण प्रो. वी.के. शर्मा को विश्वविद्यालय का नया लोकपाल नामित किया गया है। यह नियुक्ति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के छात्र शिकायत निवारण संबंधी प्रावधानों के अनुरूप की गई है।
लोकपाल की भूमिका क्या होती है?
यूजीसी के प्रावधानों के मुताबिक लोकपाल विद्यार्थियों की शिकायत निवारण व्यवस्था में अहम भूमिका निभाता है। यदि किसी विद्यार्थी की शिकायत का समाधान विश्वविद्यालय की स्टूडेंट ग्रिवांस रिड्रेसल कमेटी (SGRC) स्तर पर नहीं हो पाता, तो विद्यार्थी निर्धारित प्रक्रिया के तहत लोकपाल के समक्ष अपील कर सकता है। लोकपाल दोनों पक्षों को सुनने के बाद उचित निर्णय देता है और शिकायत के समाधान के लिए उपयुक्त राहत संबंधी आदेश पारित कर सकता है। यूजीसी के नियमों के अनुसार लोकपाल के पास आई अपीलों का निस्तारण लगभग 30 दिनों के भीतर करने का प्रावधान है।
विद्यार्थियों को मिलेगा स्वतंत्र और प्रभावी मंच
नए लोकपाल की नियुक्ति से विद्यार्थियों को अपनी शैक्षणिक और विश्वविद्यालयीय गतिविधियों से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए एक स्वतंत्र और प्रभावी मंच उपलब्ध होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन को उम्मीद है कि इस कदम से पारदर्शिता, जवाबदेही और विद्यार्थी-केंद्रित प्रशासन को और मजबूती मिलेगी।
कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने जताया विश्वास
कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं का निष्पक्ष और समयबद्ध समाधान विश्वविद्यालय प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके अनुसार एक प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था विद्यार्थियों के विश्वास को मजबूत करने के साथ-साथ विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को भी बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि नए लोकपाल के अनुभव और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों की शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी हो सकेगी।
विद्यार्थियों से प्रक्रिया अपनाने की अपील
विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों से अपील की है कि किसी भी शिकायत के समाधान के लिए निर्धारित शिकायत निवारण प्रक्रिया का ही पालन करें, ताकि मामलों का निपटारा व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से हो सके।
