शकुन्तला विश्वविद्यालय में शान से लहराया तिरंगा, कुलपति ने गिनाईं उपलब्धियां और बताईं एनआईआरएफ-नैक की चुनौतियां
लखनऊ। डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में स्वतंत्रता दिवस की 80वीं वर्षगांठ हर्षोल्लास और देशभक्ति के माहौल में मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत कुलपति आचार्य संजय सिंह ने तिरंगा ध्वजारोहण कर की। ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान से पूरा परिसर देशभक्ति की भावना से गूंज उठा।
कुलपति के साथ कुलानुशासक प्रो. आशुतोष पांडेय, वित्त अधिकारी श्रीनिवास त्रिपाठी और उपकुलसचिव अनिल कुमार मिश्रा ने तिरंगे रंग के गुब्बारे आसमान में छोड़े। इस दौरान विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने परिसर में विभिन्न प्रकार के फलदार और छायादार पौधे भी लगाए।
शोध और रैंकिंग में उपलब्धियां
कुलपति ने विश्वविद्यालय की पिछले एक वर्ष की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि भारतीय पुनर्वास परिषद की ओर से विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर सेंटर फॉर एक्सीलेंस घोषित किया गया है। शोध सहयोग, सॉफ्टवेयर विकास, कौशल संवर्धन, डेटा विश्लेषण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और ऑनलाइन कक्षाओं जैसे क्षेत्रों में 15 संस्थानों के साथ एमओयू किए गए हैं।
विश्वविद्यालय ने नेचर इंडेक्स रैंकिंग 2025 में 162वां स्थान हासिल किया है, जबकि ओवरऑल रिसर्च आउटपुट रैंकिंग में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। रसायन विज्ञान में 139वां और बायोलॉजिकल साइंस में 59वां स्थान भी विश्वविद्यालय की शोध क्षमता को दर्शाता है।
दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण की दिशा में पहल
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय की पहचान केवल एक शैक्षणिक संस्थान के रूप में नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के पुनर्वास और सशक्तीकरण के लिए काम करने वाले विशिष्ट संस्थान के रूप में भी है। विश्वविद्यालय और सेना के बीच हुए समझौते के तहत युद्ध अथवा अन्य कारणों से अंग गंवाने वाले सैनिकों के लिए कृत्रिम अंग तैयार कर नि:शुल्क उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की गई है। वहीं सिपेट के साथ प्रस्तावित सहयोग से कृत्रिम अंगों के पुर्जों के निर्माण की प्रक्रिया विश्वविद्यालय में शुरू होने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के कृत्रिम अंग एवं पुनर्वास केंद्र से अब तक 6647 दिव्यांगजनों को नि:शुल्क कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा चुके हैं, जिनमें से पिछले एक वर्ष में 1504 दिव्यांगजनों को लाभ मिला है। केंद्र में आधुनिक मॉड्यूलर कृत्रिम अंग, स्प्लिंटिंग और 3डी प्रिंटिंग तकनीक की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इंस्टालिम्ब इंडिया के साथ समझौते के तहत करीब 1.77 करोड़ रुपये की आधुनिक मशीनें, सॉफ्टवेयर और डिजिटल तकनीक स्थापित की जाएगी।
एक्सेलरेटेड और एक्सटेंडेड डिग्री प्रोग्राम
कुलपति ने विश्वविद्यालय में लागू किए गए एक्सेलरेटेड डिग्री प्रोग्राम (ADP) और एक्सटेंडेड डिग्री प्रोग्राम (EDP) को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इन व्यवस्थाओं के जरिए मेधावी और जरूरतमंद विद्यार्थियों को अपनी क्षमता और परिस्थितियों के अनुसार डिग्री पूरी करने का अवसर मिलेगा। एडीपी के तहत चार वर्ष के स्नातक पाठ्यक्रम को छह सेमेस्टर में पूरा किया जा सकता है, जबकि ईडीपी के तहत विद्यार्थियों को पढ़ाई पूरी करने के लिए अतिरिक्त सेमेस्टर की सुविधा दी गई है।
समावेशी तकनीकी पहल
समारोह में विश्वविद्यालय की समावेशी सोच और तकनीकी पहल का भी उल्लेख किया गया। दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए स्मार्ट विजन चश्मे उपलब्ध कराए गए हैं, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कैमरा सेंसर और ऑडियो सिस्टम के माध्यम से आसपास की वस्तुओं, रास्तों और बाधाओं की पहचान करने की सुविधा है। इसके अलावा दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए एनवीडीए स्क्रीन रीडर की मदद से लैपटॉप आधारित परीक्षा का सफल आयोजन भी किया गया।
शोध, खेल और रोजगार में उपलब्धियां
शोध और खेलों में भी विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कुलपति ने बताया कि इस वर्ष विद्यार्थियों ने क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुल 64 पदक जीतकर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया। पैरा खेलों में विद्यार्थियों के प्रदर्शन को उन्होंने विशेष उपलब्धि बताया। वहीं शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया में अब तक 32 शिक्षक लाभान्वित हो चुके हैं और 11 शिक्षकों की सीधी भर्ती की गई है।
रोजगार के क्षेत्र में भी इस वर्ष 175 विद्यार्थियों को कुल 257 रोजगार प्रस्ताव मिले, जिनमें 16 दिव्यांग विद्यार्थी शामिल हैं। अधिकतम पैकेज 13.36 लाख रुपये का रहा।
देशभक्ति से सराबोर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
समारोह में देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को भावपूर्ण बना दिया। रितिका ने "ऐ वतन, वतन मेरे आबाद रहे तू..." प्रस्तुत कर श्रोताओं में देशभक्ति का जज्बा भर दिया। इसके बाद अंकित द्विवेदी ने "ऐ मेरे वतन के लोगों..." की प्रस्तुति दी। प्रशांत पांडे और दीपिका ने भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में रंग भर दिया। प्रस्तुतियों के दौरान पूरा परिसर तालियों से गूंजता रहा।
पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
विश्वविद्यालय में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पौधरोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने परिसर में विभिन्न प्रकार के फलदार और छायादार पौधे लगाए, जिससे पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर का संदेश दिया गया। विश्वविद्यालय पहले से ही दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए 'सुगंध पथ' जैसी अभिनव पहल संचालित कर रहा है, जिसके तहत सुगंधित पौधों के माध्यम से दृष्टिबाधित विद्यार्थी परिसर में अपने रास्ते और गंतव्य की पहचान कर सकते हैं।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा, तकनीक, रोजगार और आत्मनिर्भरता के समान अवसर मिलें।
कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का मंच संचालन सांस्कृतिक प्रभारी डॉ. कौशिकी सिंह ने किया। समारोह में विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी मौजूद रहे। अंत में कुलपति ने स्वतंत्रता संग्राम के सभी ज्ञात-अज्ञात सेनानियों और शहीदों को नमन करते हुए देश की एकता, अखंडता और प्रगति में सभी से योगदान देने का आह्वान किया।
